केरल में ग्राम पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम सहित 1199 स्थानीय निकायों के लिए हुए चुनावों की मतगणना चल रही है। कुल 23,576 वार्डों के परिणाम सामने आने से राज्य में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। 9 और 11 दिसंबर को मतदान पूरा होने के बाद अब ये साफ संकेत मिल रहा है कि इन स्थानीय चुनावों के नतीजे 2026 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण रूझान पेश कर रहे हैं
बड़ी सफलता की ओर कांग्रेस
सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) से कड़ी चुनौती मिल रही है। पिछले दस सालों से केरल की सत्ता पर लेफ्ट का कब्जा है। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस को ग्रामीण और शहरी दोनों निकायों में पिछली बार के मुकाबले सफलता मिली उससे ये उम्मीद लगाई जा रही है कि केरल में आगामी चुनावों में सत्ता परिवर्तन हो सकता है।
इस सफलता के पीछे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रणनीति को जिम्मेदार माना जा रहा है। राहुल गांधी 2019 में वायनाड से चुनाव लड़े उसके बाद 2024 में प्रियंका गांधी को वायनाड की कमान मिली। राहुल और प्रियंका की मौजूदगी से केरल कांग्रेस की गुटबाजी पर लगाम लगी। जिसका असर निकाय चुनावों में दिख रहा है।
तिरुवनंतपुरम में थरूर से कांग्रेस को लगा झटका
भले ही केरल में कांग्रेस बढ़त की ओर दिख रही है लेकिन राजधानी तिरुवनंतपुरम के नतीजे कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। इस क्षेत्र के लोकसभा सांसद शशि थरूर हैं। और यहां पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। माना जा रहा है कि पार्टी से थरूर के अनबन का असर तिरुवनंतपुरम पर पड़ा। कहा जाता है कि थरूर राष्ट्रीय स्तर पर व्यस्त रहते हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं से दूरी का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा। ये भी कहा जा रहा है की ये पहली बार नहीं है जब थरूर का रुख कांग्रेस की लाइन से अलग दिखा हो।
फिलहाल निकाय चुनाव के जो रुझान या नतीजे सामने आए हैं उनके मुताबिक 6 कॉर्पोरेशन में से 4 पर कांग्रेस गठबंधन आगे है। वहीं ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत और म्यूनिसिपालिटी में कांग्रेस गठबंधन और एलडीएफ के बीच कड़ी टक्कर चल रही है।