एक तरफ आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेशों, विरोध-प्रदर्शनों और फिर आदेश में हुए बदलावों के बीच… पश्चिम बंगाल से आई एक मार्मिक तस्वीर ने इंसान और जानवर के बीच उस अदृश्य लेकिन गहरे रिश्ते को फिर से सामने ला दिया, जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं.
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के नवद्वीप शहर में देर रात रेलवे कॉलोनी के बाथरूम के बाहर एक नवजात बच्चा पड़ा मिला. ठंडी हवा, अँधेरा.. और बीच में वो छोटा सा बच्चा. लेकिन कहानी यहाँ ट्विस्ट लेती है.क्योंकि बच्चे के आसपास पहरा दे रहा था आवारा कुत्तों का एक पूरा झुंड. कोई भौंक नहीं, कोई हंगामा नहीं… बस एक शांत और चौकन्ना घेरा. जैसे कह रहे हों, ‘डरो मत, हम हैं न!’
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुत्ते बच्चे के चारों ओर ऐसे खड़े थे जैसे लाइफ-गार्ड ड्यूटी पर हों. किसी ने कहा, “हम उठे तो देखा कुत्ते बच्चे के चारों ओर बिलकुल चुप खड़े थे, आक्रामक बिल्कुल नहीं… जैसे सबको समझ आ गया हो कि इस बच्चे को बचाना है.’ रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवजात को जन्म के कुछ ही मिनट बाद छोड़ दिया गया था. अगर ये कुत्ते वहां न होते, तो शायद कहानी का अंत इतना खूबसूरत नहीं होता. उन्होंने अपने शरीर से बच्चे को ठंड, हवा और दूसरे जानवरों से बचाया.
ये वही समय था जब कहीं इंसानियत तो गायब था, लेकिन जानवरों का ईमान चमक रहा था. हर कुत्ता बुरा नहीं होता. ये बात हम जानते तो हैं, पर भूल जल्दी जाते हैं. कुत्तों के हमले बढ़े हैं, ये चिंता सही है. लेकिन जैसे इंसान एक जैसे नहीं होते, वैसे ही जानवर भी नहीं.
A dog is a man’s best friend… और कभी-कभी एक नवजात का भी
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर नए आदेश दिए हैं. स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन जैसी जगहों से स्ट्रे डॉग्स को शेल्टर में शिफ्ट करने को कहा गया है. नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें फिर उसी इलाके में छोड़ा जाएगा. सिर्फ रेबीज़-पॉजिटिव कुत्तों को हमेशा के लिए शेल्टर में रखने का निर्देश है.
लेकिन बंगाल की ये घटना साफ कहती है. हम उन्हें सिर्फ खतरा मानकर नहीं देख सकते. वही आवारा कुत्ते, जिनसे हम कभी-कभी डरते हैं, किसी अनजान रात में एक छोटे से बच्चे के लिए फ़रिश्ता भी बन सकते हैं.
आवारा कुत्तों ने आधी रात नवजात के लिए बनाई ‘ढाल’,इंसानियत को आईना दिखाती असली कहानी!