नई दिल्ली: देश में मानसून की धीमी रफ्तार अब चिंता की वजह बनती जा रही है। जून की शुरुआत में अच्छी बारिश की उम्मीदों के बीच अब हालात बदलते दिख रहे हैं। 1 जून से 16 जून के बीच देश में सामान्य से 35 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इसका सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि इसी समय खरीफ फसलों की बुवाई का अहम दौर चलता है।
बारिश की कमी का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि जलाशयों, भूजल स्तर और जल आपूर्ति व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो इसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकता है।
मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1 जून से 16 जून के बीच देश में सामान्य तौर पर 68.1 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल 44 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
क्षेत्रवार आंकड़े और ज्यादा चिंता बढ़ाते हैं—
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में सामान्य समय से तीन दिन देरी से प्रवेश किया। इसके बाद महाराष्ट्र और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में इसकी रफ्तार कमजोर पड़ गई।
स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुंबई में मानसून पहुंचने की सामान्य तारीख 11 जून मानी जाती है, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी मानसून वहां नहीं पहुंच सका।
धान, मक्का और दाल जैसी खरीफ फसलें बड़े पैमाने पर मानसून आधारित होती हैं। पर्याप्त बारिश नहीं होने की स्थिति में बुवाई प्रभावित हो सकती है और उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकार मानते हैं कि शुरुआती देरी कई बार पूरे कृषि चक्र को प्रभावित कर सकती है, जिससे लागत बढ़ने और उत्पादन घटने की आशंका रहती है।
कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा बैठक की और कम वर्षा वाले जिलों की पहचान कर पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए।
बैठक में सुझाव दिया गया कि—
मौसम से जुड़ी वैश्विक स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। नए अल नीनो चरण के शुरू होने के बाद चेतावनी दी गई है कि इसका असर भारत के ग्रीष्मकालीन मानसून पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इससे वर्षा आधारित फसलों—खासकर चावल और मक्का—पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही खाद्य सुरक्षा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 4 से 5 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ सकता है। यदि ऐसा होता है तो बारिश की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है।
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