मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव की आशंकाओं के बीच तेहरान से बड़ी खबर सामने आई है। ईरान की सुरक्षा एजेंसी Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने विपक्षी संगठन Mujahedin-e-Khalq (एमईके) के 100 लड़ाकों को मार गिराया है।
आईआरजीसी के अनुसार, यह झड़प उस समय हुई जब कथित तौर पर एमईके से जुड़े लोगों ने ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के तेहरान स्थित मुख्यालय के पास एक ऑपरेशन को अंजाम देने की कोशिश की। घटना के बाद राजधानी तेहरान के अत्यंत सुरक्षित माने जाने वाले मोताहारी कॉम्प्लेक्स के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
एमईके, जो ईरान की इस्लामी गणराज्य सरकार का विरोधी संगठन माना जाता है, ने अपने बयान में दावा किया है कि सोमवार रात तक उसके 150 से अधिक सदस्य सुरक्षित स्थानों पर लौट आए। संगठन का कहना है कि मारे गए और घायल सदस्यों की सूची अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को सौंपी जाएगी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि मुठभेड़ सुप्रीम लीडर के केंद्रीय मुख्यालय के पास हुई, जहां गार्डियन काउंसिल, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स, खुफिया मंत्रालय, न्यायपालिका का केंद्रीय कार्यालय और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल जैसे अहम संस्थान स्थित हैं।
इस बीच, क्षेत्रीय हालात को देखते हुए इजरायल और अमेरिका की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। हालांकि, फिलहाल किसी बड़े सैन्य टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पश्चिम एशिया में जंग जैसे हालात बनने की आशंका जताई जा रही है। अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ सकता है।
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि उस पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो वह कड़ा जवाब देगा। तेहरान का कहना है कि खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं। साथ ही ईरान और इजरायल के बीच पहले से जारी तनातनी भी इस स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
वहीं इजरायल सुरक्षा कारणों से अलर्ट पर है। विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय समीकरणों के चलते अमेरिका और इजरायल, दोनों ही ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को लेकर सतर्क हैं।
दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से कूटनीतिक टकराव जारी है। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर बाहरी दबाव बनाने की कोशिशें हुईं, हालांकि तेहरान ने इन आरोपों को खारिज किया है।
ईरान में दिसंबर-जनवरी के दौरान हुए प्रदर्शनों को भी सरकार ने सख्ती से नियंत्रित कर लिया था।
मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या तनाव कूटनीति से सुलझेगा या क्षेत्र एक बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा।