नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई अहम रणनीतिक और ऊर्जा ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है। हूतियों के मुताबिक, निशाने पर राजधानी रियाद का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, यानबू स्थित सऊदी अरामको की फैसिलिटी, राबिख ऑयल रिफाइनरी और कई अन्य सैन्य ठिकाने भी थे। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में हमलों की वास्तविक स्थिति और उनसे हुए संभावित नुकसान की तस्वीर अभी साफ नहीं है।
हूती विद्रोहियों के बयान के अनुसार, पांच से अधिक महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें दम्माम का किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नजरां का हवाई अड्डा और खमीस मुशैत का एयरबेस भी शामिल हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि बड़े ऊर्जा प्रतिष्ठानों या हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
हूतियों ने जिन ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है, उनमें सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन, सैन्य गतिविधियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। यानबू लाल सागर के तट पर स्थित प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा केंद्र है, जबकि राबिख में तेल शोधन और पेट्रोकेमिकल गतिविधियां संचालित होती हैं।
इन क्षेत्रों में किसी बड़े हमले की स्थिति में तेल आपूर्ति, औद्योगिक संचालन और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। हालांकि, फिलहाल संबंधित प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान या उनके संचालन पर असर पड़ने के बारे में कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
पिछले कुछ समय से सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच सुरक्षा तनाव बना हुआ है। हूतियों की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के दावे तथा सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से हमलों को रोकने की कार्रवाइयों की जानकारी इस टकराव का हिस्सा रही है। मौजूदा घटनाक्रम की गंभीरता का आकलन आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।
क्षेत्र में मौजूदा हालात के बीच एयर इंडिया ने अपनी उड़ानों को लेकर भी जानकारी साझा की है। कंपनी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की रियाद और दम्माम आने-जाने वाली उड़ानें 7 नवंबर 2026 तक निलंबित रहेंगी। वहीं, जेद्दा आने-जाने वाली उड़ानें 31 अक्टूबर 2026 तक निलंबित रखने की घोषणा की गई है।
एयरलाइन के मुताबिक, 24 अक्टूबर 2026 या उससे पहले जारी कन्फर्म टिकट वाले यात्री अपनी सुविधा के अनुसार बुकिंग दोबारा करा सकते हैं या टिकट रद्द करने पर पूरा रिफंड ले सकते हैं।
यात्रियों की सहायता के लिए एयर इंडिया ने +91 11 69329333 और +91 11 69329999 नंबर जारी किए हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए +91 124 6935600 हेल्पलाइन नंबर दिया गया है।
यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को सलाह है कि एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति और एयरलाइन की ओर से जारी ताजा निर्देशों की पुष्टि कर लें।
हूती विद्रोही यमन का एक सशस्त्र राजनीतिक आंदोलन हैं, जिसे अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है। यह आंदोलन मुख्य रूप से यमन के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है और राजधानी सना समेत देश के बड़े भूभाग पर इसका नियंत्रण रहा है। इसकी धार्मिक जड़ें जैदी शिया समुदाय से जुड़ी हैं।
हालांकि, हूतियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष को केवल शिया-सुन्नी विवाद के तौर पर देखना सही नहीं होगा। इसके पीछे यमन में सत्ता और नियंत्रण की लड़ाई, क्षेत्रीय प्रभाव की प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी अहम हैं।
हूती विद्रोही यमन में सऊदी अरब के सैन्य हस्तक्षेप और प्रतिबंधों को आम लोगों की मुश्किलों की वजह बताते रहे हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब हूतियों की सैन्य क्षमता और मिसाइल-ड्रोन हमलों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। यही टकराव समय-समय पर सऊदी क्षेत्र के हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों को लेकर हमलों के दावों के रूप में सामने आता है।
यमन के संघर्ष में ईरान की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ईरान पर हूती विद्रोहियों को हथियार, सैन्य प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देने के आरोप लगते रहे हैं। इस समर्थन ने हूतियों की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। हालांकि, हूतियों के अपने राजनीतिक और स्थानीय हित भी हैं, इसलिए उनके हर फैसले को सीधे ईरान के निर्देशों से जोड़ना उचित नहीं होगा।
ईरान और सऊदी अरब के बीच पश्चिम एशिया में राजनीतिक और सामरिक प्रभाव को लेकर लंबे समय से प्रतिस्पर्धा रही है। सऊदी अरब हूतियों की बढ़ती सैन्य क्षमता को अपनी सीमाओं, हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों के लिए खतरा मानता है, जबकि ईरान का समर्थन हूतियों की क्षेत्रीय स्थिति को मजबूत करने वाला कारक माना जाता है।
इस तरह यमन का संघर्ष केवल देश के भीतर सत्ता की लड़ाई तक सीमित नहीं है। इसमें क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता और सुरक्षा हित भी जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि यमन में होने वाली सैन्य गतिविधियों का असर सऊदी अरब की सुरक्षा के साथ-साथ पूरे पश्चिम एशिया के हालात पर पड़ सकता है।
फिलहाल, सऊदी अरब में कई ठिकानों पर हमले को लेकर हूतियों के दावे की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। आने वाले समय में सऊदी अधिकारियों की प्रतिक्रिया, संभावित नुकसान और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति से यह स्पष्ट होगा कि इस घटनाक्रम का व्यापक असर कितना गंभीर हो सकता है।
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