ईरान-इजराइल संघर्ष को छह दिन हो चुके हैं और दोनों पक्षों के बीच हमले जारी हैं। इस दौरान क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संघर्ष में United States की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है, जबकि Iran और Israel के बीच टकराव तेज है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि चीन और रूस इस स्थिति में कूटनीतिक समर्थन दे रहे हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर लड़ाई मुख्य रूप से ईरान और इजराइल के बीच ही केंद्रित है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का असर इजराइल की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। लगातार सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
ईरान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे इजराइल को नुकसान पहुंचने का दावा किया जा रहा है। वहीं, दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष से क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है और स्थिति अब भी अस्थिर बनी हुई है।
इज़राइल के वित्त मंत्रालय के अनुसार, ईरान के साथ जारी हवाई संघर्ष से देश की अर्थव्यवस्था को हर सप्ताह 9 अरब शेकेल (करीब 2.93 अरब डॉलर) से अधिक का नुकसान हो सकता है। भारतीय मुद्रा में यह आंकड़ा लगभग 27 हजार करोड़ रुपये प्रति सप्ताह के बराबर है। इससे साफ है कि युद्ध का असर इज़राइल की अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ रहा है। यदि यह संघर्ष जारी रहता है, तो आर्थिक नुकसान और भी बढ़ने की आशंका है।
युद्ध का असर देश के सामान्य कामकाज पर साफ दिखाई दे रहा है। इजराइल के होम फ्रंट कमांड ने कई सख्त प्रतिबंध लागू किए हैं, जिनके तहत कार्यालयों में उपस्थिति सीमित कर दी गई है। स्कूल बंद हैं और बड़ी संख्या में रिजर्व सैनिकों की तैनाती की गई है।
अधिकांश क्षेत्रों में, जरूरी सेवाओं को छोड़कर बाकी गतिविधियां रोक दी गई हैं। कई कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं। साथ ही, सार्वजनिक आयोजनों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इन कड़े कदमों के चलते अगले सप्ताह से अर्थव्यवस्था को करीब 9.4 अरब शेकेल प्रति सप्ताह तक नुकसान होने का अनुमान है।