मुंबई: हिंदी सिनेमा के इतिहास में देव आनंद और गुरु दत्त की दोस्ती का किस्सा बेहद दिलचस्प माना जाता है। दोनों की पहली मुलाकात किसी फिल्मी पार्टी या बड़े समारोह में नहीं, बल्कि प्रभात स्टूडियो में हुई थी। इस मुलाकात के पीछे एक धोबी की छोटी-सी गलती बताई जाती है, जिसकी वजह से देव आनंद की शर्ट गुरु दत्त के पास पहुंच गई। इसके बाद जो हुआ, उसने दो दिग्गज कलाकारों के बीच ऐसी दोस्ती की नींव रखी, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा के यादगार किस्सों में शामिल हो गई।
देव आनंद और गुरु दत्त की मुलाकात पुणे के प्रभात स्टूडियो में फिल्म ‘हम एक हैं’ के सेट पर हुई थी। उस समय गुरु दत्त फिल्म में कोरियोग्राफर और असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। दोनों एक-दूसरे के लिए अनजान थे और शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह मुलाकात आगे चलकर गहरी दोस्ती में बदल जाएगी।
जिस इलाके में स्टूडियो था, वहां कपड़े धुलवाने के लिए एक ही लॉन्ड्री हुआ करती थी। देव आनंद और गुरु दत्त, दोनों के कपड़े वहीं धुलने जाते थे। बताया जाता है कि एक दिन देव आनंद की एक शर्ट लॉन्ड्री से गायब हो गई। उन्होंने उस वक्त इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन उन्हें अपनी शर्ट याद थी।
कुछ समय बाद प्रभात स्टूडियो में देव आनंद की नजर एक ऐसे शख्स पर पड़ी, जिसने उनकी शर्ट पहन रखी थी। वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि गुरु दत्त थे। देव आनंद ने शर्ट पहचान ली और उनके पास जाकर बातचीत शुरू कर दी।
किस्सा कुछ यूं बताया जाता है कि देव आनंद ने गुरु दत्त से उनकी शर्ट की तारीफ करते हुए पूछा कि उन्होंने इसे कहां से खरीदा है। इस पर गुरु दत्त ने साफ-साफ बता दिया कि शर्ट उनकी नहीं है। उन्होंने बताया कि उस दिन लॉन्ड्री वाले ने उनके कपड़े नहीं धोए थे, इसलिए वह वहां गए और उन्हें यह शर्ट पसंद आ गई तो वह उसे ले आए।
गुरु दत्त की यह बेबाक बात सुनकर देव आनंद हंस पड़े। जब उन्होंने अपना परिचय देते हुए बताया कि वह देव आनंद हैं और चेतन आनंद के छोटे भाई हैं, तो गुरु दत्त को पता चला कि जिस शर्ट को वह पहन रहे हैं, वह उसी शख्स की है जो उनके सामने खड़ा है।
अपनी शर्ट की पहचान होने के बाद देव आनंद को गुरु दत्त की बात सुनकर हैरानी हुई। गुरु दत्त भी यह जानकर शर्मिंदा हो गए कि उन्होंने अनजाने में दूसरे की शर्ट पहन ली थी। हालांकि, गुरु दत्त ने जिस सहजता से पूरी बात बता दी, उससे देव आनंद का गुस्सा दूर हो गया।
इसके बाद दोनों के बीच बातचीत आगे बढ़ी। देव आनंद ने गुरु दत्त से उनका नाम और काम पूछा। गुरु दत्त ने बताया कि वह फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे हैं और आगे चलकर निर्देशक बनना चाहते हैं।
जब गुरु दत्त ने बताया कि वह डायरेक्टर बनने के लिए मुंबई आए हैं, तो देव आनंद ने उनसे कहा कि आज से वे दोस्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब वह अपनी पहली फिल्म बनाएंगे, तो गुरु दत्त ही उसका निर्देशन करेंगे।
गुरु दत्त ने भी जवाब में वादा किया कि जब वह अपनी पहली फिल्म निर्देशित करेंगे, तो उसके हीरो देव आनंद होंगे। इस तरह एक मामूली-सी घटना से शुरू हुई बातचीत दोस्ती और भविष्य में साथ काम करने के वादे तक पहुंच गई।
देव आनंद और गुरु दत्त के बीच हुआ यह वादा बाद में हकीकत में बदला। देव आनंद की फिल्म ‘बाजी’ का निर्देशन गुरु दत्त ने किया। इस फिल्म के साथ दोनों की दोस्ती ने हिंदी सिनेमा में एक खास मुकाम हासिल किया। एक शर्ट से शुरू हुआ यह किस्सा आगे चलकर दो दिग्गज कलाकारों के साथ काम करने और उनकी दोस्ती की यादगार कहानी बन गया।
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