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विश्लेषण: क्या आंकड़ों में ‘बदनाम’ राज्य ही असली गुनहगार हैं? नशे के जाल में फंसा भारत

news desk
Last updated: May 10, 2026 1:19 pm
news desk
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नई दिल्ली। देश की युवा पीढ़ी नशे की जिस दलदल में धंस रही है, उसकी हकीकत सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा डरावनी हो सकती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के हालिया आंकड़े चौंकाने वाले हैं। आमतौर पर जब भी नशे की बात आती है, तो जेहन में ‘पंजाब’ का नाम सबसे पहले आता है, लेकिन NCRB की रिपोर्ट एक अलग ही कहानी बयां कर रही है। आंकड़ों की रेस में केरल नंबर वन पर है, जबकि पंजाब इस सूची में तीसरे स्थान पर खिसक गया है।

Contents
1. टॉप 5 राज्य: जहां नशे का नेटवर्क है सबसे मजबूत2. एक साल में 47% का ‘विस्फोटक’ उछाल3. डिमांड बनाम सप्लाई: सिर्फ तस्कर ही नहीं, ‘यूजर’ भी बढ़ रहे हैं4. क्या पकड़ा गया? गांजे का बोलबाला, हेरोइन का खतरा5. सावधानी: क्या ज्यादा केस मतलब ज्यादा नशा?

1. टॉप 5 राज्य: जहां नशे का नेटवर्क है सबसे मजबूत

NCRB के साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, NDPS एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों में केरल ने सबको पीछे छोड़ दिया है…

राज्यदर्ज मामले (2022)कुल मामलों में हिस्सेदारी
केरल26,619~23%
महाराष्ट्र13,830~12%
पंजाब12,442~11%
उत्तर प्रदेश11,541~10%
तमिलनाडु10,385~09%

हैरानी की बात: सिर्फ इन 5 राज्यों में ही देश के करीब 65% नशे के मामले दर्ज हैं. गुजरात, जिसका नाम अक्सर बंदरगाहों पर बड़ी बरामदगी के लिए आता है, इस सूची में काफी नीचे है। राज्यसभा में गृह मंत्रालय ने एनसीआरबी के हवाले से जो राज्यवार आंकड़े दिए, उनके अनुसार साल 2022 में पंजाब में एनडीपीएस एक्ट 12,442 केस दर्ज हुए।

2. एक साल में 47% का ‘विस्फोटक’ उछाल

साल 2021 में देश भर में NDPS के 78,331 मामले थे, जो 2022 में बढ़कर 1.15 लाख के पार हो गए। यह करीब 47% की बढ़ोतरी है। यह उछाल दो तरफा संकेत देता है-या तो पुलिस की सक्रियता बढ़ी है या फिर नशे की मांग और सप्लाई दोनों ने समाज में गहरी पैठ बना ली है।

3. डिमांड बनाम सप्लाई: सिर्फ तस्कर ही नहीं, ‘यूजर’ भी बढ़ रहे हैं

आंकड़ों का सबसे डरावना पहलू यह है कि पुलिस अब केवल सप्लायर को ही नहीं पकड़ रही, बल्कि ‘उपभोक्ता’ यानी नशा करने वालों की संख्या में भी भारी वृद्धि देखी गई है।

  • व्यक्तिगत सेवन के मामले: 2021 में 46,029 थे, जो 2022 में 68% बढ़कर 77,172 हो गए।
  • तस्करी के मामले: इसमें 18% की बढ़ोतरी दर्ज की गई (38,064 मामले)।

यह साफ है कि समस्या सिर्फ सीमा पार से आने वाली ड्रग्स की नहीं है, बल्कि हमारे समाज के भीतर बढ़ती ‘डिमांड’ की भी है।

4. क्या पकड़ा गया? गांजे का बोलबाला, हेरोइन का खतरा

साल 2022 में एनडीपीएस से जुड़े मामलों में कुल 1,44,812 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 1,07,808 था। यानी एक ही साल में गिरफ्तारियों में करीब 34 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

जब्ती के आंकड़ों पर नजर डालें तो गांजा सबसे आगे रहा। 2022 में लगभग 17,11,916 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया, जबकि कुल नशीले पदार्थों की जब्ती 17,16,700 किलोग्राम रही। इससे साफ होता है कि मात्रा के लिहाज से गांजा अब भी ड्रग्स तस्करी का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है।

  • गांजा: 17.11 लाख किलोग्राम (कुल जब्ती का शेर हिस्सा).
  • पोस्ता छिलका: 3.18 लाख किलोग्राम से ज्यादा.
  • हेरोइन: 4,798 किलोग्राम (वजन कम लेकिन मारक क्षमता और कीमत बहुत ज्यादा).
  • कोकीन: मात्र 71.82 किलोग्राम, जो इसके ‘एलिट’ और महंगे नेटवर्क को दर्शाता है.

5. सावधानी: क्या ज्यादा केस मतलब ज्यादा नशा?

NCRB ने खुद अपनी रिपोर्ट में आगाह किया है कि इन आंकड़ों को अंतिम सच न माना जाए. इसके पीछे तीन बड़े कारण हो सकते हैं..

  1. पुलिसिंग का तरीका: केरल में केस ज्यादा होने का मतलब यह भी हो सकता है कि वहां की पुलिस छोटे से छोटे सेवन के मामले पर भी FIR दर्ज कर रही है।
  2. जागरूकता और रजिस्ट्रेशन: जिन राज्यों में लोग ज्यादा जागरूक हैं या पुलिस का नेटवर्क सक्रिय है, वहां आंकड़े ज्यादा दिखते हैं।
  3. स्थानीय कानून: राज्यों की अपनी पुलिसिंग प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं।

क्या पंजाब की ‘बदनामी’ केवल एक धारणा है या फिर अन्य राज्यों में नशा इतनी खामोशी से फैल रहा है कि वह पुलिस की फाइलों तक नहीं पहुंच पा रहा? 2024 के विस्तृत आंकड़ों का इंतजार है, लेकिन वर्तमान तस्वीर देश के भविष्य (युवाओं) के लिए खतरे की घंटी है।

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