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नई दिल्ली/तेहरान। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) एक बार फिर विनाशकारी युद्ध की आग में झुलस रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के संभावित उत्तराधिकारी मुज्तबा खामेनेई के बीच की यह तनातनी अब तक के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता चंद दिनों में ही तार-तार हो गया और अब खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में चौतरफा मिसाइलें बरस रही हैं।
गुरुवार को अमेरिका द्वारा ईरान के भीतर किए गए भीषण हवाई हमलों के बाद, आज (शुक्रवार) तड़के ईरान ने बहरीन, कतर और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ जवाबी हमले किए हैं।
वाशिंगटन ने ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) तोड़ने का आरोप लगाते हुए हमलों का दूसरा दौर (Second Round) शुरू कर दिया है। इस बार अमेरिकी एयरस्ट्राइक का दायरा सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान की राजधानी तेहरान और सेमनन प्रांत के हवाई क्षेत्र में घुसकर बमबारी की।
क्यों खास है सेमनन प्रांत? सेमनन वही इलाका है जहां ईरान का सीक्रेट स्पेस प्रोग्राम और सबसे खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलें (जैसे खैबरशिकन) बनाने का मुख्य केंद्र है।
इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन, अल्लाह-अकबर हिल रिहायशी इलाकों और कई रणनीतिक पुलों को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया (IRNA) के मुताबिक, इन अमेरिकी हमलों में अब तक 35 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 300 से ज्यादा घायल हैं।
अमेरिका की इस भीषण मार से तिलमिलाए ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सहयोगियों पर ड्रोन और मिसाइलों से पलटवार किया। बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ईरान ने आज तड़के भारी गोलाबारी की, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
ईरानी सेना के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम ज़ोलफ़गारी ने अमेरिका को खुली चुनौती देते हुए कहा:
“होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) ईरान की अभेद्य ‘रेड लाइन’ है। अगर डोनाल्ड ट्रंप ने हमारी बिजली परियोजनाओं या पुलों को निशाना बनाना बंद नहीं किया, तो ईरान इस पूरे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मलबे में तब्दील कर देगा।”
इसी साल 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर अचानक हमला किया था, तो ईरान ने दुनिया की लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। इसके कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान पर पहुंच गई थीं और गैस का गंभीर संकट खड़ा हो गया था।
हालाँकि, पिछले महीने दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने के लिए एक समझौता हुआ था, लेकिन बुधवार को अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की दोबारा नौसैनिक घेराबंदी करने के बाद यह समझौता पूरी तरह टूट गया। अगर यह जंग ऐसे ही आगे बढ़ी, तो आने वाले दिनों में भारत सहित पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
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