बांग्लादेश में गारमेंट मजदूरों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजधानी ढाका के मिरपुर, आशुलिया और गाजीपुर समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर न्यूनतम 30,000 टका मासिक वेतन, कथित ब्लैकलिस्टिंग खत्म करने और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर झड़पें हुईं और सड़कें जाम कर दी गईं हैं। वहीं सुरक्षा कारणों के चलते कुछ गारमेंट फैक्ट्रियों को बंद भी करना पड़ा। इस बीच, श्रमिक नेता नजमा अख्तर ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और अराजकता का फायदा भारत समेत अन्य पड़ोसी देशों के व्यापारियों को मिल रहा है।
‘ढाका ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमिलिटो गारमेंट्स लेबर फेडरेशन की अध्यक्ष नजमा अख्तर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग में जारी हिंसक प्रदर्शनों पर चिंता जताई हैं। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ और अशांति से मजदूरों की नौकरियां खतरे में पड़ रही हैं। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो रहा है। नजमा अख्तर के मुताबिक, कारखानों में हिंसा और अस्थिरता के कारण विदेशी खरीदार बांग्लादेश से खरीदारी कम करके भारत और अन्य देशों का रुख कर सकते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो लाखों गारमेंट मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा अशांति में सभी प्रदर्शनकारी वास्तविक मजदूर नहीं हैं। उनके अनुसार, कुछ बाहरी लोग और सरकार से नाराज तत्व मजदूरों के नाम पर अराजकता फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मजदूर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर सकते हैं, लेकिन फैक्ट्रियों में घुसकर तोड़फोड़ करना स्वीकार्य नहीं है। नजमा अख्तर ने ऐसे मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि हिंसा से मजदूरों की मांगें कमजोर पड़ सकती हैं और देश के महत्वपूर्ण गारमेंट उद्योग की स्थिति और खराब हो सकती है।
बांग्लादेश के आशुलिया क्षेत्र में गारमेंट मजदूरों के उग्र विरोध के बाद रविवार को 50 से अधिक कपड़ा फैक्ट्रियों में अचानक छुट्टी घोषित करनी पड़ी। प्रदर्शन के दौरान उग्र भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हुई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आसपास की फैक्ट्रियों पर ईंट-पत्थर फेंके, जिसमें एक पुलिस अधिकारी के घायल होने की खबर है।
इस बीच, श्रमिक नेता नजमा अख्तर ने मजदूरों से किसी के बहकावे में आकर तोड़फोड़ न करने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग मजदूरों के अधिकारों से जुड़े आंदोलन को अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मजदूरों को अपनी शिकायतें संबंधित अधिकारियों के सामने लिखित रूप में रखने की सलाह दी।
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