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मुनीर की मांग पर पानी फेरेगा तेहरान? मोजतबा से मिलने के लिए बेचैन है मुनीर, ‘सीधी बात’ के प्रस्ताव को ठुकरा सकता है ईरान!

इस्लामाबाद/तेहरान। रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव को शांत करने के लिए पाकिस्तान ‘बैकचैनल डिप्लोमेसी’ के जरिए बड़ा दांव तो खेल रहा है, लेकिन उसकी यह कोशिश परवान चढ़ने से पहले ही दम तोड़ सकती है।

पाकिस्तान के शक्तिशाली सैन्य कमांडर फील्ड मार्शल असीम मुनीर (Field Marshal Asim Munir) ने ईरान के सर्वोच्च नेता माने जा रहे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) से आमने-सामने की सीधी बातचीत की मांग की है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि ईरान इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर सकता है।

आखिर ऐसा क्या कारण है कि ईरान अपने सबसे करीबी पड़ोसी देश के सैन्य प्रमुख की इस मांग के आगे सुरक्षा की एक ऐसी दीवार खड़ी कर रहा है जिसे लांघना नामुमकिन है?

अमेरिका और इजरायल से छिपा है मोजतबा का ठिकाना

ईरान की भू-राजनीतिक रणनीति को समझने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि तेहरान अपने संभावित भावी सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को दुनिया की नजरों से पूरी तरह बचाकर रखता है। मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा और गोपनीयता का स्तर इतना कड़ा है कि आज की तारीख में अमेरिका की सीआईए (CIA) और इजरायल की मोसाद (Mossad) जैसी दुनिया की सबसे आधुनिक खुफिया एजेंसियों को भी उनकी सटीक लोकेशन का अंदाजा नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप का वो बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर चुके हैं कि अमेरिकी खुफिया तंत्र को यह सटीक जानकारी नहीं है कि मोजतबा खामेनेई इस वक्त किस हाल में हैं और कहां मौजूद हैं। उनके बारे में वाशिंगटन के पास भी कोई ठोस या पुख्ता सूचना नहीं है।

मुनीर से मुलाकात क्यों है ईरान के लिए ‘हाई रिस्क’?

ऐसे समय में जब ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों और वैज्ञानिकों को पहले निशाना बनाया जा चुका है, तेहरान मोजतबा खामेनेई को लेकर किसी भी तरह का जोखिम (Risk) नहीं लेना चाहता।

लोकेशन लीक होने का डर: यदि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर की मोजतबा खामेनेई के साथ कोई भी प्रत्यक्ष या सीक्रेट मुलाकात तय होती है, तो कूटनीतिक प्रोटोकॉल और आवाजाही के कारण मोजतबा का वर्तमान ठिकाना और उनका सुरक्षा चक्र दुनिया के सामने आ सकता है।

विदेशी ताकतों की नजर: पाकिस्तान के इस प्रयास पर अमेरिका और उसकी सहयोगी ताकतों की पैनी नजर है। ऐसे में किसी भी तीसरे देश के वीआईपी (VIP) मूवमेंट से मोजतबा की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगने का खतरा बढ़ सकता है।

क्या बेनतीजा रहेगी पाकिस्तान की मध्यस्थता?

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भले ही पिछले दो दिनों से तेहरान में डेरा डाले हुए हैं और ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के कमांडरों के साथ बैठकें कर रहे हैं, लेकिन जब बात मोजतबा खामेनेई से सीधे संपर्क की आएगी, तो ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। यही कारण है कि फील्ड मार्शल मुनीर की यह बड़ी कूटनीतिक मांग पूरी होने की उम्मीद बेहद कम है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान विवाद को सुलझाने की पाकिस्तान की कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है।

news desk

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