कांग्रेस नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए मुलाकात की इच्छा जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने और न्यायिक प्रक्रिया के कारण मुलाकात नहीं हो सकी।
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मुलाकात की कोशिश को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दोनों नेता लोकतांत्रिक अधिकारों के कथित दमन, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने उनसे मुलाकात नहीं की। अब बार एंड बेंच की रिपोर्ट में इसके पीछे चार प्रमुख कारण बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जिन मुद्दों पर कांग्रेस नेता चर्चा करना चाहते थे, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
इसके अलावा, अदालत की संवैधानिक भूमिका और संभावित याचिकाओं पर सुनवाई भी इस घटनाक्रम से जुड़े अहम पहलू बताए गए हैं।
1. मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित
रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जिन मुद्दों को उठाना चाहते थे, वे पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में उन्हीं विषयों पर अलग से मुलाकात करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है।
2. प्रशासनिक मामलों में अदालत की सीमित भूमिका
दूसरी वजह सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक भूमिका से जुड़ी है। अदालत सरकार के प्रशासनिक कामकाज में सामान्य तौर पर सीधे हस्तक्षेप करने वाली संस्था नहीं है। उसका काम संविधान और कानून के दायरे में न्यायिक समीक्षा करना है। इसलिए प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी शिकायतों को उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उठाना जरूरी है।
3. मौलिक अधिकारों के लिए न्यायिक रास्ता खुला
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यदि नेताओं को लगता है कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो वे कानून के तहत अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसके लिए याचिका दायर की जा सकती है और अदालत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मामले पर विचार कर सकती है।
4. संबंधित मामलों पर सुनवाई प्रस्तावित
चौथी वजह यह बताई गई कि संबंधित मामलों पर मंगलवार को सुनवाई होनी थी। राहुल गांधी और खरगे की ओर से यदि कोई याचिका दायर की जाती है, तो उस पर भी संबंधित मामलों के साथ सुनवाई की जा सकती है। इस तरह मुद्दों को व्यक्तिगत मुलाकात के बजाय अदालत की औपचारिक प्रक्रिया में उठाया जा सकता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को कहा था कि वह राहुल गांधी के साथ 12 अक्टूबर को CJI सूर्यकांत से मुलाकात करना चाहते हैं।
उनका उद्देश्य लोकतांत्रिक अधिकारों के कथित दमन, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और निर्वाचन आयोग से जुड़े विवादों को उठाना था।
खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए देश में ‘अघोषित आपातकाल’ जैसी स्थिति होने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। ये कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करती रही है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं ने दिल्ली में प्रदर्शन भी किया था। कांग्रेस का आरोप है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और विपक्ष के अधिकारों से जुड़े सवालों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
इसी बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था। इस दौरान अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी।
CJI से मुलाकात नहीं होने के बाद इन मुद्दों को लेकर न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक बयानबाजी, दोनों पर नजर रहेगी। यदि संबंधित पक्ष अदालत में याचिका दायर करते हैं, तो मामलों पर सुनवाई के दौरान उनके तर्क रखे जा सकते हैं।
हालांकि, मुलाकात नहीं होने को किसी पक्ष की मांग खारिज किए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की स्थिति संबंधित याचिकाओं, उनकी सुनवाई और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगी।
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