Trending News

चातुर्मास में सो रहे भगवान विष्णु भाद्रपद की एकादशी पर ही क्यों बदलते हैं करवट? जानिए परिवर्तिनी एकादशी का रहस्य और राजा बलि से जुड़ी पौराणिक कथा

नई दिल्ली: भगवान विष्णु की देवशयनी और देवउठनी एकादशी की तरह परिवर्तिनी एकादशी का भी हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान योगनिद्रा में लीन भगवान विष्णु भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी पर करवट बदलते हैं। लेकिन चार महीने की इस निद्रा के बीच यही दिन क्यों खास है? और इस एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे भगवान विष्णु और राजा बलि से जुड़ी पौराणिक कथा बताई जाती है।

चार महीने की योगनिद्रा के बीच क्यों करवट बदलते हैं श्रीहरि?

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवउठनी एकादशी पर उनके जागने की मान्यता है।

इन दोनों एकादशियों के बीच भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी आती है। यह भगवान विष्णु की चार महीने की योगनिद्रा का मध्य समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विश्राम कर रहे श्रीहरि करवट बदलते हैं। इसी वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी या पार्श्व एकादशी कहा जाता है।

इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

परिवर्तिनी एकादशी का वामन अवतार से क्या संबंध है?

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने का भी विधान है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा बलि का घमंड तोड़ने के लिए वामन अवतार लिया था और उनसे भिक्षा में तीन पग भूमि मांगी थी।

कथा के मुताबिक, भगवान ने अपने दो पगों में ही पृथ्वी और स्वर्ग लोक को नाप लिया। जब तीसरा पग रखने के लिए जगह नहीं बची, तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया।

राजा बलि को भगवान विष्णु ने क्या वरदान दिया था?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। साथ ही हर साल चार महीने के लिए पाताल लोक आकर विश्राम करने का वचन दिया।

मान्यता है कि तभी से भगवान विष्णु हर वर्ष चार महीने पाताल लोक में विश्राम करते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। परिवर्तिनी एकादशी इसी चातुर्मास के दौरान आती है और इस दिन भगवान विष्णु के करवट बदलने की मान्यता के कारण इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

2026 में कब शुरू हुआ और कब समाप्त होगा चातुर्मास?

वर्ष 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई को हुई थी और इसका समापन 21 नवंबर को होगा। इसी अवधि में परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष यह एकादशी 21 सितंबर 2026 को है।

vineet verma

Share
Published by
vineet verma

Recent Posts

मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया जीत का मंत्र, कांग्रेस-सपा और बीजेपी पर साधा निशाना, यूपी में पांचवीं बार सरकार बनाने का लक्ष्य

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी ने अपनी तैयारियां…

2 hours ago

23 साल का ऐतिहासिक सफर खत्म! क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने इंटरनेशनल फुटबॉल को कहा अलविदा

पुर्तगाल के दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। पांच…

2 hours ago

मौत की सजा के बावजूद बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना, बोलीं- अपने लोगों के बीच मरना पसंद करूंगी

भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री ने AP को ईमेल भेजकर दिसंबर में वापसी का…

3 hours ago

यूपी में कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार, विंध्य-पूर्वांचल प्रोजेक्ट के लिए 2,800 करोड़ जारी

उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को एक अभूतपूर्व रफ्तार देते हुए योगी सरकार…

3 hours ago

IPL 2027 से पहले CSK-SRH में महाट्रेड! 4 खिलाड़ियों की अदला-बदली, लिविंगस्टोन की हुई चेन्नई में एंट्री

हार्दिक पांड्या के ट्रेड की चर्चाओं के बीच चेन्नई सुपर किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद ने…

3 hours ago