चिकित्सा जगत से एक बड़ी खबर आई है. स्टॉकहोम के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने सोमवार को 2025 के फिजियोलॉजी या मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया है. इस वर्ष यह प्रतिष्ठित सम्मान अमेरिका की मैरी ई. ब्रेकॉ, फ्रेड राम्सडेल और जापान के शिमोन सकागुची को संयुक्त रूप से दिया गया है.
इस ऐतिहासिक खोज के लिए दिया गया नोबेल सम्मान
तीनों वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार इसलिए मिला क्योंकि उन्होंने अपनी ऐतिहासिक खोज में बताया कि शरीर की इम्यून सिस्टम में एक खास तंत्र मौजूद है, जो उसे अपने ही अंगों पर हमला करने से रोकता है. सामान्यत: इम्यून सिस्टम वायरस और बैक्टीरिया से बचाता है, लेकिन कभी-कभी यही सिस्टम गलती से शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है, जिससे ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे डायबिटीज टाइप-1, ल्यूपस और रूमेटॉइड आर्थराइटिस होती हैं.
पहले माना जाता था कि यह नियंत्रण सिर्फ शरीर के अंदर बनता है, लेकिन इन विजेताओं ने खोजा कि शरीर के बाहरी हिस्सों में भी रेगुलेटरी टी सेल्स (Tregs) नामक कोशिकाएं होती हैं, जो इम्यून सिस्टम पर “ब्रेक” लगाती हैं और अंगों को सुरक्षित रखती हैं.
कौन हैं मैरी ई. ब्रेकॉ ?
मैरी ई. ब्रेकॉ का जन्म 1961 में हुआ. उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पीएच.डी. की डिग्री हासिल की और आज सीएटल के Institute for Systems Biology में सीनियर प्रोग्राम मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं. मैरी और उनके सहयोगी फ्रेड राम्सडेल ने मिलकर FOXP3 जीन और इम्यून सिस्टम की कार्यप्रणाली पर अहम शोध किया, जिसने ऑटोइम्यून बीमारियों को समझने का नया रास्ता खोला.
फ्रेड राम्सडेल का अहम योगदान
फ्रेड राम्सडेल का जन्म 4 दिसंबर 1960 को अमेरिका के इलिनॉय राज्य में हुआ. उन्होंने UCLA से 1987 में इम्यूनोलॉजी में पीएच.डी. पूरी की. वे वर्तमान में सैन फ्रांसिस्को स्थित Sonoma Biotherapeutics से जुड़े हुए हैं और इससे पहले कई बायोटेक कंपनियों में शोध कार्य कर चुके हैं. राम्सडेल ने FOXP3 जीन की खोज और उसकी भूमिका को ऑटोइम्यून रोगों से जोड़ने में बड़ा योगदान दिया.
शिमोन सकागुची ने समझाया इम्यून सिस्टम का रहस्य
शिमोन सकागुची का जन्म 1951 में जापान के शीगा प्रान्त में हुआ था. उन्होंने 1976 में Kyoto University से M.D. और 1982 में Ph.D. की उपाधि प्राप्त की. वर्तमान में वे Osaka University में डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर हैं. वर्ष 1995 में सकागुची ने Regulatory T Cells (Tregs) की खोज की, जिसने इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने वाले तंत्र की समझ को बदल दिया और चिकित्सा विज्ञान के लिए नए आयाम खोले.