जब दुनिया की नजरें मिडिल-ईस्ट के झगड़ों पर टिकी थीं, किम जोंग उन ने “सुनान” से एक साथ 10 शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर सबको चौंका दिया। यह महज एक टेस्ट नहीं, बल्कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के लिए एक सीधा ‘ओपन चैलेंज’ है।
क्यों खास है यह ‘मल्टीपल लॉन्च’ ?
यह हमला पुरानी टेस्टिंग से कहीं ज्यादा खतरनाक है क्योंकि: एक साथ 10 मिसाइलें छोड़ने का मतलब है कि किम अब दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ‘ओवरलोड’ या जाम करने की ताकत रखते हैं।
किम जोंग उन ने हाल ही में अपने नए 5,000 टन वाले डिस्ट्रॉयर का जायजा लिया। यह जहाज ऐसी क्रूज मिसाइलों से लैस है जो रडार के नीचे उड़कर चुपचाप हमला कर सकती हैं। इन मिसाइलों का टारगेट बिल्कुल क्लियर है, दक्षिण कोरिया में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस।
तनाव का असली ‘ट्रिगर’ क्या है?
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का 11 दिनों का महा-अभ्यास किम जोंग उन के लिए ‘रेड लाइन’ है, जिसे वे सीधे हमले की तैयारी मानते हैं। अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की बढ़ती सैन्य नजदीकी से किम को अपनी सत्ता और सुरक्षा पर बड़ा खतरा महसूस हो रहा है।
अमेरिका अभी यूक्रेन और मिडिल-ईस्ट (इजरायल-ईरान) के मोर्चों पर उलझा है, जिसका फायदा उठाकर किम अपनी परमाणु ताकत को दुनिया से ‘मंजूर’ करवाना चाहते हैं।
10 मिसाइलों का एक साथ परीक्षण कर किम ये संदेश देना चाह रहे है कि अब वो केवल टेस्टिंग नहीं कर रहे, बल्कि युद्ध के लिए पूरी तरह ‘तैयार’ हैं।
किम सिस्टर्स’ का कड़ा स्टैंड
किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने साफ कर दिया है कि अब बात ‘टेबल’ पर नहीं, ‘मैदान’ में होगी। प्योंगयांग ने डिप्लोमेसी की खिड़की बंद कर दी है और अब उनका पूरा फोकस मिसाइलों की तैनाती पर है।

उत्तर कोरिया अब सिर्फ टेस्ट नहीं कर रहा, वह युद्ध के लिए “रेडी-टू-यूज़” मोड में आ गया है। 10 मिसाइलों का एक साथ उड़ना सियोल और वाशिंगटन के लिए एक कड़ा “स्ट्रेस टेस्ट” है।
अब आगे क्या?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तो बस ट्रेलर है। आने वाले हफ्तों में उत्तर कोरिया एक नया जासूसी सैटेलाइट या शायद अपना 7वां न्यूक्लियर टेस्ट भी कर सकता है।