शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों के कठिन व्रत और उपासना के बाद कन्या पूजन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि छोटी कन्याओं का पूजन करने से साक्षात माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने से ही नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रानुसार कन्या पूजन के लिए कन्याओं की उम्र का सही होना कितना आवश्यक है? किस उम्र की कन्या को पूजने से आपकी कौन सी मनोकामना पूरी होती है, आइए जानते हैं देवी भागवत पुराण के अनुसार इससे जुड़े गुप्त शास्त्रीय नियम!
देवी भागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि में हमेशा 2 से 10 साल तक की उम्र की कन्याओं का ही पूजन करना चाहिए। वहीं 2 साल से छोटी और 10 साल से अधिक उम्र की कन्या का पूजन शास्त्रीय नियमों के अनुसार नहीं किया जाता।
उम्र के हिसाब से कन्याओं के रूप इस प्रकार हैं:
कन्या पूजन के दौरान एक छोटे बालक को भी पूजा में बैठाया जाता है, जिसे भैरव बाबा का रूप माना जाता है।
अपनी विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सही उम्र की कन्या का पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है:
यदि आप भी अपनी किसी विशेष इच्छा को पूरा करना चाहते हैं, तो नवरात्रि की अष्टमी या नवमी तिथि पर इन शास्त्रीय नियमों और उम्र के अनुसार ही कन्याओं का पूजन करें।
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