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‘शांतिपूर्ण विरोध भी नहीं कर सकते तो लोकतंत्र में क्या बचेगा?’ पप्पू यादव ने उठाए विपक्ष के अधिकार पर सवाल

नई दिल्ली: पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने विपक्ष के नेताओं के विरोध-प्रदर्शन और अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शांति से बैठकर लोगों से नहीं मिल सकते, सांसद और विधायक आपस में बातचीत नहीं कर सकते और अपनी बात रखने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी नहीं कर सकते, तो फिर लोकतंत्र में क्या बचेगा।

पप्पू यादव ने कहा कि विपक्ष की भूमिका सिर्फ संसद में बैठने तक सीमित नहीं है। जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना और सरकार तक अपनी बात पहुंचाना भी विपक्ष की जिम्मेदारी है। ऐसे में अगर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने पर भी रोक लगाई जाती है तो विपक्ष आखिर अपनी बात किस तरह सामने रखेगा, यह बड़ा सवाल है।

‘विपक्ष का काम सिर्फ संसद में बैठना नहीं’

सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष के पास अपनी बात रखने और जनता के मुद्दों को उठाने के लिए शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर नेताओं को शांतिपूर्वक अपनी बात रखने की अनुमति नहीं होगी तो फिर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने का रास्ता क्या बचेगा।

उनका बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन और उनके अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। पप्पू यादव ने इसी संदर्भ में सवाल उठाते हुए कहा कि सांसदों और विधायकों को आपस में बात करने तथा जनता के मुद्दों को सामने रखने की जगह मिलनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की बात का भी किया जिक्र

पप्पू यादव ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट की ओर से कही गई बात का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अदालत किसी मामले में अपनी बात कह चुकी है तो क्या उसके बाद भी जिम्मेदार लोगों को अपने पद पर बने रहना चाहिए।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि किसी मामले में कार्रवाई होने के बाद कोई जिम्मेदार व्यक्ति सिर्फ यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है कि उसे इसकी जानकारी नहीं थी या उसने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था।

जिम्मेदारी सिर्फ आदेश देने वाले की नहीं

Delhi: Purnia MP Pappu Yadav says, “You tell me one thing. In a democracy, if the leader of the opposition does not have the right to sit or meet peacefully, if MPs and MLAs cannot meet, and if there is no right to conduct a peaceful protest, then what should happen? What the Supreme Court said, now should they stay even for a minute? Do they have the right to say, ‘It is not in my knowledge, I was not informed, I did not give any such order’? On the other hand, when every single fraud of the TCS company was revealed, all top people, of all companies, everyone…”— IANS (@ians_india) October 7, 2026

पप्पू यादव ने कहा कि किसी भी मामले में सिर्फ उस व्यक्ति की भूमिका देखना पर्याप्त नहीं है जिसने आदेश दिया हो। यह भी देखना जरूरी है कि पूरी कार्रवाई किस तरह हुई और इसमें किस स्तर पर किसकी जिम्मेदारी बनती है।

उन्होंने कहा कि किसी घटना या कार्रवाई में गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। केवल यह कह देना कि संबंधित व्यक्ति को इसकी जानकारी नहीं थी, जिम्मेदारी से बचने का आधार नहीं हो सकता।

‘मुझे जानकारी नहीं थी’ कहने से खत्म नहीं होगी जवाबदेही

सांसद ने सवाल उठाया कि अगर किसी फैसले या कार्रवाई से लोगों को परेशानी हुई है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी। उनके मुताबिक, किसी मामले में जिम्मेदारी तय करते समय पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को देखना जरूरी है।

अपने बयान में पप्पू यादव ने कंपनियों से जुड़े कथित मामलों का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि किसी कंपनी में गड़बड़ी सामने आने पर केवल एक व्यक्ति की भूमिका तक जांच सीमित नहीं रहती, बल्कि ऊपर से नीचे तक जिम्मेदारी तय करने की बात होती है।

पप्पू यादव का कहना है कि इसी तरह सार्वजनिक मामलों में भी यह तय होना चाहिए कि किसी फैसले या कार्रवाई के लिए वास्तविक तौर पर कौन जिम्मेदार है और केवल जानकारी नहीं होने का दावा करके जवाबदेही से बचने की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

vineet verma

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