मेनोपॉज महिलाओं के जीवन की वह प्राकृतिक अवस्था है जब उनके पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं।

आमतौर पर यह 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होता है, जबकि भारत और दुनिया भर में इसकी औसत आयु लगभग 50 से 52 वर्ष है।

मेनोपॉज से कुछ साल पहले शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन कम होने लगते हैं, जिससे पीरियड्स अनियमित होना शुरू हो जाते हैं।

इसमें अचानक चेहरे, गर्दन और छाती पर तेज गर्मी महसूस होती है। साथ ही, सोते समय अत्यधिक पसीना आने से नींद में खलल पड़ता है।

इस दौरान चिड़चिड़ापन, चिंता, उदासी, योनि में सूखापन, वजन बढ़ना और हड्डियों के कमजोर होने (ऑस्टियोपोरोसिस) का खतरा बढ़ जाता है।

इससे बचने के लिए संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम अपनाएं, तथा मसालेदार भोजन, अत्यधिक कैफीन और शराब से दूरी बनाकर रखें।

यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है; अत्यधिक या असहनीय लक्षण होने पर तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से सलाह लें।