भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक मंदिर हैं, जिनका इतिहास और उनसे जुड़ी कहानियां बेहद रोमांचक और रहस्यमयी हैं।

उनमें से एक ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर है, जिसकी कहानी बेहद रहस्यमयी और पवित्र मानी जाती है।

जगन्नाथ मंदिर की कहानी मालवा के राजा इंद्रद्युम्न से जुड़ी है, जो भगवान विष्णु के परम भक्त थे।

राजा इंद्रद्युम्न को नील माधव की गुप्त पूजा का पता चला। उन्होंने मूर्ति की खोज शुरू की, लेकिन नील माधव अचानक गायब हो गए।

सपने में भगवान विष्णु ने राजा को पवित्र ‘दारु’ (लकड़ी) से मूर्ति बनाने का आदेश दिया। राजा को समुद्र में वह दिव्य लकड़ी मिल गई।

विश्वकर्मा जी बूढ़े ब्राह्मण का रूप धरकर राजा के दरबार पहुंचे और मूर्ति बनाने के लिए एक कड़ी शर्त रखी।

विश्वकर्मा जी ने शर्त रखी—21 दिन तक बंद कमरे में मूर्तियां बनाएंगे, लेकिन दरवाजा खुलते ही काम छोड़ देंगे।

दरवाजा खुलते ही मूर्तिकार अंतर्ध्यान हो गए। जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की अधूरी मूर्तियां मिलीं। भगवान ने कहा—“यही मेरा इच्छित रूप है।”

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आज भी जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां उसी रूप में पूजी जाती हैं। हर 12 या 19 साल में नवकलेवर के दौरान मूर्तियां बदली जाती हैं।