कजरी तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में महिलाएँ बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं।

2026 में यानी आज 31 अगस्त को कजरी तीज का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ नीमड़ी माता की पूजा की जाती है।

जरी तीज पर शादीशुदा महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए, जबकि कुंवारी लड़कियाँ मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।

इस दिन महिलाएँ पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और अन्न-पानी का सेवन नहीं करतीं। गर्भवती महिलाओं को इस नियम से छूट दी जाती है।

शाम के समय महिलाएँ हरे या लाल रंग के पारंपरिक परिधान पहनती हैं और हाथों में मेहंदी लगाकर सोलह श्रृंगार करती हैं।

कजरी तीज के पावन पर्व पर भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ नीमड़ी माता यानी नीम के पेड़ की डाली की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

शाम को दीवार या थाली पर गोबर-मिट्टी से छोटा तालाब या कुंड बनाया जाता है। इसमें नीम की टहनी लगाकर दूध, जल, रोली, अक्षत और मेहंदी चढ़ाई जाती है।

चंद्रोदय के बाद चांदी की अंगूठी और गेहूं हाथ में लेकर चंद्रमा को दूध व जल से अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद सत्तू खाकर महिलाएँ व्रत खोलती हैं।