नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। आठ भुजाओं के कारण मां कूष्मांडा  अष्टभुजा कहलाती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कमंडल पवित्रता, धनुष एकाग्रता और बाण संकटों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।

मां के हाथों में कमल पवित्रता और शांति, जबकि अमृत कलश स्वास्थ्य, जीवन और सकारात्मकता का प्रतीक है।

चक्र धर्म की रक्षा और गदा आत्मबल का प्रतीक मानी जाती है। ये अधर्म के विरुद्ध शक्ति दर्शाती हैं।

मान्यता है कि मां कूष्मांडा की जपमाला में अष्टसिद्धियों और नवनिधियों को प्रदान करने वाली शक्ति समाहित है।

सिंह पर सवार मां कूष्मांडा भक्तों को बल, बुद्धि और यश प्रदान करती हैं। उनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं की जाती है।