अहमदाबाद  में सहियर गरबा  का एक दृश्य. माना जाता है कि यह पवित्र रिवाज पहले वैदिक काल (लगभग 2000–1500 ईसा पूर्व) से शुरू हुआ था.

नवरात्रि का यह प्रसिद्ध त्योहार सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि कहानी और संस्कृति का संगम है. इसकी शुरुवात कुछ गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में हुई थी, खासकर अहमदाबाद के गांव में.

कहा जाता है कि गरबा की शुरुआत देवी दुर्गा की आराधना से हुई. लोग देवी की भक्ति में रात भर घूम-घूम कर नृत्य करते थे.

पहले यह नृत्य सिर्फ छोटे गांव तक सीमित था. लेकिन आज, शहरों के बड़े मैदान और स्टेडियम भी गरबा की रौनक से जगमगाते हैं.

महिलाएं घाघरा-चोली, पुरुष कढ़ाईदार कुर्ता, झुमके और दुपट्टे ये सभी गरबा को और खूबसूरत बनाते हैं.

ढोलक, डमरू और हारमोनियम की धुन पर कदम मिलाते हुए लोग घंटों तक नृत्य करते हैं. हर झुमका और हर दुपट्टा ताल के साथ झूमता है.