साबूदाना उपवास के दौरान सबसे ज्यादा खाया जाता है. इससे बनी खिचड़ी, वड़ा और खीर पेट को हल्का और ऊर्जा देने वाले माने जाते हैं.

साबूदाना किसी अनाज से नहीं, बल्कि कसावा (टैपिओका) की जड़ से तैयार किया जाता है. यह एक स्टार्ची रूट होता है, जिसे उबालकर और प्रोसेस करके साबूदाना बनाया जाता है.

कसावा की जड़ों को छीलकर पहले बारीक काटा जाता है. फिर इन्हें पानी में धोकर और पीसकर इनमें से स्टार्च निकाला जाता है.

निकल चुके स्टार्च को बड़े-बड़े टैंक में रख कर, पानी ऊपर से निकाल दिया जाता है और नीचे बचा गाढ़ा स्टार्च सुखाया जाता है.

सूखे स्टार्च को गीला करके गोल आकार दिया जाता है. फिर मशीन या छलनी से गुजारकर छोटे-छोटे मोती जैसे दाने बनाए जाते हैं.

इन दानों को धूप या ड्रायर में सुखाया जाता है. सूखने के बाद ये सफेद और हल्के मोती जैसे दिखने लगते हैं. यही बाजार में मिलने वाला साबूदाना है.