लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। सीएम योगी के साधु-संतों, सत्ता और कुर्सी को लेकर दिए गए बयान पर अखिलेश यादव ने पलटवार किया। सपा प्रमुख ने कहा, “हम साधु-संत थोड़ी हैं, जो गद्दी चाहिए, हमें तो कुर्सी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कुर्सी जनता की सेवा करने और उसके लिए काम करने के लिए चाहिए।
अखिलेश यादव ने सोमवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में यह टिप्पणी की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर निशाना साधते हुए सत्ता और जनसेवा को लेकर अपनी बात रखी। इसी कार्यक्रम में अलग-अलग दलों और राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े करीब 20 नेताओं ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कहा था कि साधु-संतों का लक्ष्य सत्ता या कुर्सी हासिल करना नहीं, बल्कि लोक कल्याण और सेवा करना होता है। उन्होंने यह भी कहा था कि सत्ता और कुर्सी की लालसा उन लोगों में होती है, जिन्हें परिवारवाद और सत्ता का मोह होता है।
इसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “हम साधु-संत थोड़ी हैं, जो गद्दी चाहिए, हमें तो कुर्सी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि गद्दी योगी को चाहिए, जबकि उन्हें कुर्सी इसलिए चाहिए ताकि वे जनता की सेवा कर सकें और उसके लिए काम कर सकें।
अखिलेश यादव की इस टिप्पणी को मुख्यमंत्री के बयान के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता, नेतृत्व और जनसेवा को लेकर बहस जारी है।
अखिलेश यादव की मौजूदगी में लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में करीब 20 नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ली। इनमें अमेरिका से लौटीं सबीना परवीन, बदायूं की दातागंज सीट से दो बार विधायक रह चुके सिनोद शाक्य, बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर और मेरठ के बसपा नेता दारा सिंह प्रजापति शामिल रहे।
इन नेताओं के अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी राम बहादुर पासी भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। पासी को मायावती सरकार के दौरान करीबी अधिकारियों में गिना जाता था। उनके सपा में आने को भी इस कार्यक्रम की अहम राजनीतिक गतिविधियों में शामिल माना जा रहा है।
राम बहादुर पासी प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद सक्रिय राजनीति में आए। वह गोंडा के जिलाधिकारी और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के उपाध्यक्ष जैसे पदों पर रह चुके हैं। उन्हें अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान तेजतर्रार अधिकारी के रूप में भी जाना जाता था।
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने नागरिक एकता पार्टी बनाई। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। अब समाजवादी पार्टी में उनकी एंट्री के बाद प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका फिर चर्चा में है।
समाजवादी पार्टी की सदस्यता लेने के बाद राम बहादुर पासी ने अखिलेश यादव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें पार्टी में शामिल किया, जिसके लिए वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं।
पासी ने यह भी बताया कि वह वर्ष 2015 तक सेवा में थे और उस समय अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वहीं, अखिलेश यादव ने भी पूर्व आईएएस अधिकारी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि राम बहादुर पासी ने अपनी सेवा के दौरान भी अपनी अलग पहचान बनाई। इस दौरान अखिलेश ने उनके नाम में ‘राम’ का जिक्र करते हुए कहा कि जिसके नाम में राम जुड़ा हो, उसके सब काम बन जाएंगे।
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