इस्लामाबाद, 11 अप्रैल 2026: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने की कोशिश में शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हाई-लेवल शांति वार्ता शुरू हो गई। अमेरिकी टीम का नेतृत्व JD Vance कर रहे हैं, जबकि ईरानी पक्ष की कमान अब्बास अराघची और मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ संभाल रहे हैं। शुरुआती दौर की बातचीत में फिलहाल कोई बड़ा ब्रेकथ्रू सामने नहीं आया है, लेकिन दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ी है। सबसे बड़ा फोकस फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में ढील पर बना हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत कुछ हिस्सों में अप्रत्यक्ष तरीके से और पाकिस्तानी मध्यस्थता के जरिए भी हो रही है। अमेरिकी पक्ष ने ईरान के 10-पॉइंट प्लान को बातचीत की एक workable शुरुआत माना है, लेकिन कई अहम बिंदुओं पर अब भी उसका रुख काफी सख्त है। अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलना है, ताकि तेल सप्लाई सामान्य रह सके। इसके साथ ही 8 अप्रैल से लागू दो हफ्ते के अस्थायी सीजफायर पर भी दोनों पक्ष फिलहाल सहमत बताए जा रहे हैं।
न्यूक्लियर एनरिचमेंट और सैंक्शंस सबसे बड़े अड़ंगे
वार्ता में सबसे बड़ा पेंच ईरान के यूरिनियम एनरिचमेंट अधिकार को लेकर बना हुआ है। अमेरिका साफ कर चुका है कि ईरान को किसी भी हालत में हाई-लेवल एनरिचमेंट की इजाजत नहीं दी जाएगी, जबकि तेहरान इसे अपना गैर-परक्राम्य अधिकार बता रहा है। इसके अलावा ईरान सभी प्राइमरी और सेकेंडरी सैंक्शंस पूरी तरह हटाने, फ्रोजन एसेट्स की तुरंत रिहाई और युद्ध में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति जैसी मांगों पर अड़ा हुआ है।
चालबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। फिलहाल बातचीत शुरुआती चरण में है और विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है। सबसे बड़े sticking points अभी भी न्यूक्लियर एनरिचमेंट, सैंक्शंस हटाना, लेबनान सीजफायर और compensation बने हुए हैं।
अमेरिका ने किन मुद्दों को माना है? (US Position)
अमेरिका (ट्रंप प्रशासन) ने ईरान के 10-पॉइंट प्लान को “workable basis for negotiation” माना है, लेकिन कई अहम शर्तों पर सख्त रुख अपनाया हुआ है।
अमेरिका ने अभी तक इन पर सहमति या आंशिक स्वीकृति दिखाई है:
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलना (तेल निर्यात के लिए) — यह अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
- दो हफ्ते का अस्थायी सीजफायर पहले ही मान लिया गया है (8 अप्रैल से)।
- ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा (यह अमेरिका का रेड लाइन है)।
- कुछ सैंक्शंस रिलीफ (प्रतिबंधों में ढील) पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन पूर्ण हटाने पर सहमति नहीं।
- क्षेत्र में शांति और प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह आदि) पर कुछ नियंत्रण।
अमेरिका नहीं मान रहा है:
- ईरान का यूरिनियम एनरिचमेंट (enrichment) का अधिकार — ट्रंप ने साफ कहा है “there will be no enrichment of Uranium”।
- ईरान को पूर्ण सैंक्शंस हटाना और फ्रोजन एसेट्स की तुरंत रिहाई।
- युद्ध क्षतिपूर्ति (compensation) का भुगतान।
- अमेरिकी सैन्य अड्डों की पूर्ण वापसी।
- लेबनान में पूर्ण सीजफायर को इस वार्ता का हिस्सा मानना (अमेरिका और इजराइल कह रहे हैं कि लेबनान अलग मुद्दा है)।
ईरान ने यह भी साफ संकेत दिया है कि अगर लेबनान में सीजफायर, फ्रोजन फंड्स की रिहाई और अमेरिकी नॉन-अग्रेशन गारंटी जैसी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो वार्ता आगे बढ़ने के बजाय रद्द भी हो सकती है। दूसरी तरफ अमेरिकी 15-पॉइंट प्लान में ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम पर सख्त रोक, प्रॉक्सी ग्रुप्स को सपोर्ट बंद करने और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों को सीमित करने जैसी शर्तें शामिल हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि JD Vance ने कहा कि अगर ईरान “अच्छे विश्वास” के साथ बातचीत करेगा तो वॉशिंगटन भी लचीला रुख अपना सकता है, लेकिन किसी तरह की रणनीतिक