इस्लामाबाद | 11 अप्रैल 2026: अमेरिका और ईरान के बीच आज होने वाली हाई-वोल्टेज शांति वार्ता से पहले माहौल पूरी तरह गरमा गया है। एक तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने ईरान को ‘बख्शे नहीं जाने’ की खुली धमकी दी है, तो दूसरी तरफ ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने 168 मासूम बच्चों की तस्वीरों के साथ ‘Minab-168’ मिशन के जरिए दुनिया को भावुक कर दिया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही यह बैठक तय करेगी कि पश्चिम एशिया शांति की ओर बढ़ेगा या महायुद्ध की ओर।
‘Minab-168’: जब फ्लाइट की खाली सीटों पर बिछी मासूमों की यादें
इस्लामाबाद पहुंचते ही ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी फ्लाइट की 168 खाली सीटों पर मीनाब स्कूल हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें, उनके छोटे जूते और खून से सने स्कूल बैग रखे थे।
ग़ालिबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा— “इस उड़ान के मेरे साथी… #Minab168″। बता दें कि 28 फरवरी 2026 को दक्षिणी ईरान के एक स्कूल पर हुए हमले में 168 बच्चियां और शिक्षक मारे गए थे, जिसे ईरान अमेरिका-इजराइल की साजिश मानता है।
जेडी वांस की सख्त चेतावनी: “अगर खेल खेला तो बख्शेंगे नहीं”
शांति वार्ता की मेज पर बैठने से पहले ही अमेरिकी खेमे ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कड़े शब्दों में कहा:
“अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत करेगा तो अमेरिका तैयार है, लेकिन अगर उसने हमारे साथ खेल खेलने की कोशिश की, तो हमारी टीम उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।”
इसे ट्रंप प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, ईरान ने पलटवार करते हुए कहा कि उसे अमेरिका के वादों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है क्योंकि पिछला अनुभव सिर्फ धोखे का रहा है।
शांति वार्ता के मुख्य बिंदु: दोनों देशों की क्या हैं मांगें?
इस्लामाबाद में हो रही इस गुप्त और महत्वपूर्ण वार्ता में कई बड़े मुद्दे मेज पर हैं:
- अमेरिका की मांग: ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम तुरंत रोके, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (तेल सप्लाई मार्ग) को खोले और क्षेत्रीय तनाव कम करे।
- ईरान की मांग: लेबनान में स्थायी युद्धविराम हो, ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और ‘मीनाब स्कूल हमले’ की अंतरराष्ट्रीय जांच हो।
- पाकिस्तान की भूमिका: मेजबान और मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान इस युद्ध को रोकने की आखिरी कोशिश कर रहा है।
यह शांति वार्ता क्यों मायने रखती है? (Why this matters)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस वार्ता की सफलता तेल सप्लाई बहाल कर सकती है। फरवरी 2026 से जारी अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
‘Minab-168’ के जरिए ईरान ने दुनिया के सामने अमेरिका को कटघरे में खड़ा किया है, जिससे कूटनीतिक दबाव बढ़ा है।