पटना: बिहार में शराबबंदी कानून एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। इस बार विवाद की शुरुआत कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन के बयान से हुई। उन्होंने शराबबंदी कानून की व्यापक समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि अगर सरकार सच में गंभीर है तो विधानसभा के सभी विधायकों का ब्लड टेस्ट कराया जाए। इतना ही नहीं, उन्होंने सरकारी और पुलिस अधिकारियों के ब्लड टेस्ट की भी बात उठाई।
विधायक का बयान
विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान अभिषेक रंजन ने कहा, “सरकार अगर वास्तव में शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर गंभीर है तो उसे सिर्फ प्रतीकात्मक कदमों से आगे बढ़ना होगा। विधानसभा के सभी विधायकों का ब्लड टेस्ट कर दिया जाए, तो शराबबंदी की असली तस्वीर सामने आ जाएगी। इससे कानून का पालन कितना प्रभावी है और कितनी सख्ती से लागू किया जा रहा है, यह स्पष्ट हो जाएगा।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। इस मुद्दे पर सीपीआईएल नेता और विधायक संदीप सौरव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ब्लड टेस्ट की मांग को लेकर अनावश्यक राजनीतिक शोर मचाने के बजाय राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर ऐसी कोई प्रक्रिया अपनाई जाती है तो उन्हें व्यक्तिगत तौर पर कोई आपत्ति नहीं है।
संदीप सौरव ने आरोप लगाया कि राज्य में शराबबंदी कानून पूरी तरह प्रभावी नहीं है और कई जगह अवैध रूप से शराब निर्माण और बिक्री जारी है। उन्होंने कहा कि ब्लड टेस्ट की मांग से शुरू हुई यह बहस अब व्यापक राजनीतिक विमर्श का रूप ले चुकी है।
आगे क्या होगा
ब्लड टेस्ट की मांग को लेकर शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है और विधानसभा में गंभीर बहस का विषय बन सकता है।