लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच अपनी ताकत बढ़ाने की कवायद तेज हो गई है। इसी बीच योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने लखनऊ में बड़ा सियासी दांव चला है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को आयोजित प्रेसवार्ता में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कई नेताओं ने सुभासपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसके अलावा समाजवादी पार्टी से जुड़े 40 लोग भी राजभर की पार्टी में शामिल हुए।
इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सुभासपा के संगठन विस्तार और पूर्वांचल समेत प्रदेश की अन्य राजनीतिक सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान की पार्टी उत्तर प्रदेश में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी कर रही है। पार्टी की ओर से आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर अपना पक्ष रखने के संकेत दिए जा चुके हैं।
लोजपा (रामविलास) के यूपी प्रभारी अरुण भारती ने पहले कहा था कि पार्टी गठबंधन के मंच पर अपनी बात रखेगी। हालांकि, उन्होंने सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का भी जिक्र किया था।
ऐसे समय में पार्टी के कई पदाधिकारियों का सुभासपा में शामिल होना यूपी की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इन नेताओं के पार्टी छोड़ने से लोजपा (रामविलास) की चुनावी रणनीति पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
इस घटनाक्रम का एक राजनीतिक पहलू यह भी है कि चिराग पासवान की पार्टी हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रियता बढ़ाती नजर आई है। चिराग पासवान ने अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पुण्यतिथि से जुड़ा कार्यक्रम लखनऊ में आयोजित किया था।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत बीजेपी के कई नेता शामिल हुए थे। ऐसे में एनडीए के सहयोगी दल के नेताओं का सुभासपा में जाना गठबंधन के भीतर राजनीतिक समीकरणों और सहयोगी दलों की अपनी-अपनी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से जुड़े कई पदाधिकारियों ने सुभासपा की सदस्यता ली। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
इन नेताओं के सुभासपा में शामिल होने से राजभर की पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ओम प्रकाश राजभर की पार्टी में केवल लोजपा (रामविलास) के नेता ही शामिल नहीं हुए, बल्कि समाजवादी पार्टी से जुड़े 40 लोगों ने भी सुभासपा का दामन थाम लिया। ये लोग मोहम्मद मुर्शिद खान के नेतृत्व में पार्टी में शामिल हुए।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं का पाला बदलना राजनीतिक दलों के लिए अहम हो सकता है। सुभासपा की यह पहल संगठन का विस्तार करने और आगामी चुनाव में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले ही 2027 में प्रस्तावित हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल दल भी प्रदेश में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे में ओम प्रकाश राजभर की ओर से लोजपा (रामविलास) और सपा से जुड़े लोगों को पार्टी में शामिल कराना चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम घटनाक्रम है। अब देखना होगा कि सुभासपा का यह संगठनात्मक विस्तार आगामी चुनाव में कितना प्रभाव डालता है और प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर इसका क्या असर पड़ता है।
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