नई दिल्ली/मेरठ। पश्चिमी यूपी और दिल्ली में आतंक का पर्याय बना मोंटी उर्फ आशू पुलिस मुठभेड़ में ढेर। कुख्यात उधम सिंह गैंग का मुख्य शार्पशूटर था मोंटी, सिर पर था 50 हजार का इनाम।मुरादाबाद के एक्सपोर्टर से 5 करोड़ की रंगदारी मांगने के बाद पुलिस के रडार पर आया था अपराधी।
अपराध के एक काले अध्याय का अंत
दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन चुके इनामी बदमाश मोंटी उर्फ आशू (उर्फ मोनू) का साम्राज्य आखिरकार खाकी के शिकंजे में आकर खत्म हो गया। पुलिस और बदमाशों के बीच हुई एक भीषण मुठभेड़ में मोंटी को मार गिराया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मोंटी पर हत्या, डकैती और रंगदारी जैसे 36 संगीन मामले दर्ज थे।
उधम सिंह गैंग का ‘राइट हैंड’ और वसूली का मास्टरमाइंड
जांच में सामने आया है कि मोंटी महज एक अपराधी नहीं, बल्कि कुख्यात उधम सिंह गैंग का सक्रिय और भरोसेमंद सदस्य था। उसने संगठित अपराध का एक ऐसा जाल बुना था, जहां वह बड़े कारोबारियों को निशाना बनाता था। उसकी सबसे हालिया और बड़ी वारदात मुरादाबाद के एक बड़े निर्यात कारोबारी से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगना थी। पैसे न देने पर जान से मारने की धमकी देकर उसने इलाके में दहशत पैदा कर दी थी।
एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी: आधी रात को हुई घेराबंदी
पुलिस को सटीक सूचना मिली थी कि मोंटी अपना ठिकाना बदलने की फिराक में है। स्पेशल टीम ने जब इलाके की घेराबंदी की, तो खुद को फंसता देख मोंटी ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोलियां मोंटी के सीने और पेट में लगीं। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
36 मुकदमों की फेहरिस्त: खौफ का दूसरा नाम
मोंटी का आपराधिक इतिहास दिल्ली-एनसीआर और यूपी के थानों में काले अक्षरों में दर्ज है:- हत्या और हत्या के प्रयास: 12 से अधिक मामले।
- लूट और डकैती: संगठित तरीके से राजमार्गों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना।
- रंगदारी: व्यापारियों से करोड़ों की उगाही करना उसका मुख्य पेशा था।
मोंटी के खात्मे के बाद दिल्ली और पश्चिमी यूपी के व्यापारिक संगठनों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, पुलिस का काम अभी खत्म नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि मोंटी के नेटवर्क से जुड़े अन्य गुर्गों और उसे पनाह देने वालों की तलाश तेज कर दी गई है।