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NDA में सीट शेयरिंग के बाद मांझी ने कहा – ‘परिणाम भुगतना…’! क्या चुनावों में पड़ेगा असर?

साथ भी हो और दुखी भी हो. ऐसे सहयोगी फायदा पहुंचाएंगे या नुकसान. फिलहाल इस सवाल का जवाब बिहार की सियासत में तलाशा जा रहा है. एनडीए में रविवार की शाम सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया गया. सहयोगी इस बंटवारे को मान भी गए. लेकिन उत्साहित नहीं हुए. ऐसा उनके ही बयानों को देख कर लगता है.

जीतनराम मांझी ने जताई नाराजगी?

सबसे बड़ा झटका इस बार हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी को लगा है. मांझी को उम्मीद थी कि उन्हें 15 से 16 सीटें मिलेंगी, लेकिन सीट शेयरिंग में उनके खाते में केवल 6 सीटें आई हैं, जो पिछली बार की तुलना में भी एक सीट कम है. इस पर उन्होने अपनी प्रतिक्रिया दी ‘आलाकमान ने जो निर्णय लिया वह सम्मानजनक है, लेकिन 6 सीट देकर हमारे महत्व को कम आंकना सही नहीं है. एनडीए को इस फैसले का परिणाम भुगतना पड़ सकता है’.

उपेंद्र कुशवाहा भी दुखी!


वहीं, उपेंद्र नाथ कुशवाहा भी सीट बंटवारे से निराश दिखाई दिए. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि ‘इस निर्णय से कई उम्मीदवारों और उनके समर्थकों का मन दुखी होगा. कुछ परिस्थितियां बाहर से दिखती हैं, लेकिन कई पहलू अंदर से ही समझे जा सकते हैं. मैं आशा करता हूं कि समय के साथ सभी लोग निर्णय की न्याय संगतता को समझेंगे.’

नीतीश कुमार गठबंधन में नहीं रहे ‘बड़े भाई’?


इस बार की सीट बंटवारे के साथ यह भी साफ हो गया है कि नीतीश कुमार की “बड़े भाई” की भूमिका भी खत्म हो गई है. क्योंकि इससे पहले तक के चुनावों में जेडीयू ज्यादा सीटों पर लड़ती थी. लेकिन इस बार उसे बीजेपी के बराबर ही सीटें मिली हैं. हालांकि जेडीयू की तरफ से जीतन राम मांझी या उपेन्द्र कुशवाहा की तरह कोई प्रतिक्रिया तो नहीं आई है. लेकिन सवाल ये है कि ज्यादा सीटों पर लड़ने वाली जेडीयू बराबर की सीटों पर कितनी सहज होगी ?

मांझी तो सीट बंटवारे का परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहे हैं. तो क्या ये माना जाए कि एनडीए में सीट बंटवारा तो हो गया लेकिन बंटवारे के फार्मूले को लेकर सहयोगी नाराज हैं. सवाल ये उठ रहा है कि इनकी नाराजगी किस रूप में सामने आएगी. क्या मांझी, उपेन्द्र कुशवाहा और जेडीयू अपनी अपनी सीटों के अलावा चुनाव में जोर नहीं लगाएगे. अगर ऐसा हुआ तो चुनाव में एनडीए को नुकसान उठाना पड़ सकता है. हालांकि ये सहयोगी एनडीए से अलग होने की बात नहीं कह रहे हैं. लेकिन आधे मन से ये सहयोगी चुनाव में पूरा बहुमत जुटा पाएंगे, ये बड़ा सवाल है.

news desk

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