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UN सुरक्षा परिषद में ईरान पर अमेरिका के सख्त रुख से बढ़ी चिंता! ट्रंप के दूत बोले ‘सभी विकल्प खुले हैं…’

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान को लेकर हुई आपात बैठक ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिका ने इस मंच से ईरान के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया और साफ कर दिया कि वह वहां हो रहे दमन को नजरअंदाज नहीं करेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका “ईरान के बहादुर लोगों” के साथ खड़ा है और ईरान में जारी “नरसंहार” को रोकने के लिए सभी विकल्प खुले हैं।

ईरान में क्यों भड़का जनआक्रोश

ईरान में विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 के आखिर से शुरू हुए थे। इसकी जड़ में गहराता आर्थिक संकट, मुद्रा का लगातार गिरना, महंगाई और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें हैं। धीरे-धीरे ये प्रदर्शन धार्मिक शासन के खिलाफ खुली बगावत में बदल गए। सरकार ने हालात काबू में करने के लिए इंटरनेट ब्लैकआउट लगाया और सुरक्षा बलों के जरिए सख्त कार्रवाई की। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक इस दमन में अब तक 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 3,000 तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है।

अमेरिका का सख्त संदेश और ट्रंप की चेतावनी

सुरक्षा परिषद की बैठक में माइक वाल्ट्ज ने ईरानी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप सिर्फ बयान देने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि कार्रवाई करने में विश्वास रखते हैं। वाल्ट्ज ने ईरान के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि ये प्रदर्शन किसी विदेशी साजिश का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक, ईरानी लोग खुद अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं और शासन अपने ही नागरिकों से डर रहा है। अमेरिका ने यह भी दोहराया कि नरसंहार रोकने के लिए “सभी विकल्प खुले हैं”, जिनमें सैन्य कदम भी शामिल हो सकते हैं।

ईरान का पलटवार और यूएन की चिंता

अमेरिकी आरोपों पर ईरान ने कड़ा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप राजदूत घोलामहुसैन दरजी ने अमेरिका पर झूठ और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान किसी टकराव की तलाश में नहीं है, लेकिन किसी भी आक्रामकता का “निर्णायक, संतुलित और कानूनी” जवाब देगा।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने हालात को बेहद चिंताजनक बताया है। यूएन अधिकारी मार्था पोबी ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की, जबकि महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया। इस बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैन्य ताकत भी तैनात की है, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं।

कुल मिलाकर, ईरान में जारी अशांति अब घरेलू मुद्दा नहीं रह गई है। अमेरिका के खुले समर्थन और ईरान के कड़े विरोध के बीच यह संकट अंतरराष्ट्रीय तनाव का रूप ले चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दमन जारी रहा या बाहरी हस्तक्षेप बढ़ा, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र ने मौतों और हिंसा की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच की मांग की है।

news desk

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