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UGC-NET Re-Exam: दो महीने बाद NTA ने मानी प्रश्नपत्रों की गड़बड़ी, राहुल गांधी ने पूछा- छात्रों की गलती क्या?

UGC-NET जून 2026 के तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने के फैसले पर कांग्रेस ने NTA और केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि अगर प्रश्नपत्रों में इतनी गंभीर खामियां थीं तो उन्हें परीक्षा के तुरंत बाद क्यों नहीं पकड़ा गया? छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

NTA ने UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर UGC-NET जून 2026 की परीक्षा से जुड़े नोटिस उपलब्ध हैं।

परीक्षा के करीब दो महीने बाद सामने आई गड़बड़ी

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है कि जून में परीक्षा होने के बाद प्रश्नपत्रों की खामियां इतने लंबे समय तक जांच के दायरे से बाहर कैसे रहीं। पार्टी का कहना है कि अभ्यर्थियों ने महीनों तक तैयारी की, परीक्षा शुल्क जमा किया और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में समय और पैसा खर्च किया। अब उन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा।

कांग्रेस के मुताबिक, यह सिर्फ दोबारा परीक्षा कराने का मामला नहीं है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

राहुल गांधी ने NTA पर साधा निशाना

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार और NTA पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया आखिर किस तरह काम कर रही थी।

राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रश्नपत्रों से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच केवल दोबारा परीक्षा कराने तक सीमित रहेगी या इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

उन्होंने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा कि क्या प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक हुए थे या मामला केवल प्रश्नपत्र तैयार करने और जांचने में हुई लापरवाही का है।

जयराम रमेश ने पूछा- गलतियां पकड़ने में इतना वक्त क्यों लगा?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी NTA के फैसले को लेकर सवाल उठाए। उनका मुख्य सवाल है कि अगर प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियां थीं, तो परीक्षा के बाद उनकी पहचान करने में करीब दो महीने क्यों लगे?

उन्होंने यह भी पूछा कि दोबारा परीक्षा की वजह से जिन छात्रों के आगे की पढ़ाई या विश्वविद्यालय प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित होगी, उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा।

प्रश्नपत्रों में क्या-क्या गड़बड़ियां थीं?

कांग्रेस के अनुसार, जांच में प्रश्नपत्रों से जुड़ी कई तरह की त्रुटियां सामने आईं। इनमें नामों की गलत वर्तनी, किताबों के शीर्षकों में गलतियां, प्रश्नों की भाषा से जुड़ी त्रुटियां और कुछ प्रश्नों के दोहराए जाने जैसे आरोप शामिल हैं।

कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा में इस तरह की गलतियां केवल प्रिंटिंग की समस्या नहीं हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने, संपादन, मॉडरेशन और अंतिम मंजूरी की पूरी प्रक्रिया पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

क्या छात्रों को मिलेगा कोई राहत पैकेज?

अब सबसे बड़ा सवाल उन अभ्यर्थियों को लेकर है, जिन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी। छात्रों को फिर से तैयारी करनी होगी और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ेगा।

इसके अलावा UGC-NET का परिणाम कई उम्मीदवारों के लिए विश्वविद्यालयों में प्रवेश, जूनियर रिसर्च फेलोशिप और असिस्टेंट प्रोफेसर पात्रता से जुड़ा होता है। इसलिए परीक्षा में देरी का असर उनके आगे के अकादमिक कैलेंडर पर भी पड़ सकता है। NTA के अनुसार UGC-NET का आयोजन असिस्टेंट प्रोफेसर और JRF जैसी पात्रताओं के निर्धारण के लिए किया जाता है।

9 और 10 सितंबर को होगी दोबारा परीक्षा

NTA के तय कार्यक्रम के मुताबिक 9 सितंबर को अंग्रेजी और कॉमर्स, जबकि 10 सितंबर को समाजशास्त्र की दोबारा परीक्षा कराई जाएगी।

अब छात्रों की नजर इस बात पर है कि NTA दोबारा परीक्षा को कितनी पारदर्शिता के साथ आयोजित करता है और आगे ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

असली सवाल सिर्फ री-एग्जाम का नहीं

UGC-NET विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर किसी राष्ट्रीय परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करने और जांचने की प्रक्रिया इतनी कमजोर है कि गंभीर गलतियां परीक्षा के बाद सामने आती हैं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी सवाल यही है कि दोबारा परीक्षा के साथ उनके समय, पैसे और करियर पर पड़े असर की भरपाई कैसे होगी। वहीं कांग्रेस इस मुद्दे को NTA की जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जोड़कर सरकार को घेर रही है।

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Meta Description: UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा होगी। NTA के फैसले पर राहुल गांधी और कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए पूछा कि गलतियां पकड़ने में दो महीने क्यों लगे और छात्रों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

news desk

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