बीते कुछ दिनों से दुनिया में थर्ड वर्ल्ड वार की आहट तेज होती हुई नजर आ रही है। जहां एक ओर अमेरिका लगातार कई देशों पर अपना दबदबा कायम कर रहा है, वहीं वह उन देशों में तख्तापलट कराने की कोशिशों में भी लगा हुआ है जो उसके सामने झुकते नहीं।
उसने वेनेजुएला में यह किया और अब ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान पर कब हमला होगा, यह किसी को पता नहीं है। ईरान पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन ईरान पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका के सामने नहीं झुकेगा और अगर अमेरिका हमला करता है तो इस बार ईरान उसे छोड़ने वाला नहीं है।
ऐसे हालात में इस्लामी देश लगातार “इस्लामिक नाटो” बनाने में लगे हुए हैं और इसको लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं। लेकिन इस संगठन को बड़ा झटका तब लगा जब तुर्की ने खुद को इस डिफेंस पैक्ट से बाहर कर लिया। ऐसे में इस संगठन की ताकत कम होती नजर आ रही है। हालांकि पहले कहा जा रहा था कि बातचीत से मामला हल हो जाएगा, लेकिन तुर्की ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं।
इस्लामिक नाटो की कोशिश नाकाम
खाड़ी देश के एक अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की और कहा कि सऊदी अरब का तुर्की के साथ अलग रक्षा समझौता जरूर है, लेकिन पाकिस्तान के साथ किया गया समझौता पूरी तरह द्विपक्षीय है। अधिकारी ने कहा – “यह पाकिस्तान के साथ एक अलग और सीमित रक्षा संबंध है। तुर्की के साथ हमारे अपने समझौते हैं, लेकिन पाकिस्तान वाला समझौता केवल दो देशों के बीच ही रहेगा।”
क्या अमेरिका के दबाव में आ गया तुर्की?
हालांकि तुर्की ने पाकिस्तान के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता दिखाई है, लेकिन उसकी इस्लामिक नाटो बनाने की कोशिश पर डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के कारण रोक लग गई। तुर्की नाटो देशों का सदस्य है और वह अमेरिकी फाइटर जेट F-35 की डील भी करना चाहता है। यह डील अब तक अटकी हुई है, इसलिए तुर्की ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता जो अमेरिका को नाराज कर सके।