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’22 करोड़ वोटर्स का डेटा चीन ने चुरा लिया…’ ट्रंप का सनसनीखेज दावा, अमेरिकी चुनाव प्रणाली पर फिर उठाए बड़े सवाल

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के नाम अपने प्राइम-टाइम संबोधन में चुनावी प्रणाली को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि चीन ने अमेरिकी चुनाव डेटा के साथ इतिहास की सबसे बड़ी छेड़छाड़ की और गैरकानूनी तरीके से 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की फाइलें हासिल कर लीं। अपने 25 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा कि चुनाव प्रणाली में मौजूद गंभीर कमियों से जुड़ी खुफिया जानकारी अब सार्वजनिक की जा रही है।

चीन पर लगाया चुनावी डेटा चोरी का आरोप

व्हाइट हाउस से राष्ट्र के नाम संबोधन में ट्रंप ने कहा कि 2020 के चुनाव के समय से ही चीन ने अमेरिकी चुनाव डेटा के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की। उनका दावा है कि इसी दौरान 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों का डेटा गैरकानूनी तरीके से हासिल किया गया, जिससे चुनाव सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हुआ।

‘डीप स्टेट ने सच्चाई छिपाने की कोशिश की’

ट्रंप ने आरोप लगाया कि चीन की इस कथित कार्रवाई को ‘डीप स्टेट’ के लोगों ने छिपाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव कराने के मामले में पूरी तरह विफल साबित हुई है और मौजूदा व्यवस्था पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

चुनाव प्रणाली पर फिर उठाए सवाल

राष्ट्रपति ने कहा कि हर अमेरिकी नागरिक को यह भरोसा होना चाहिए कि उसका वोट सही तरीके से दर्ज और गिना जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जहां धोखाधड़ी और बाहरी दखल लगभग असंभव हो, लेकिन मौजूदा प्रणाली इस कसौटी पर खरी नहीं उतरती।

2020 चुनाव को लेकर नहीं दिया नया सबूत

हालांकि अपने पूरे संबोधन में ट्रंप ने चुनावी धांधली के आरोप दोहराए, लेकिन उन्होंने ऐसा कोई नया ठोस सबूत पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो कि 2020 के चुनाव में वोट बदले गए या नतीजों में हेरफेर हुई। उन्होंने यह जरूर कहा कि 2020 में वेनेजुएला के चुनाव में धांधली हुई थी।

चीन पर लगे आरोप पहले भी लग चुके हैं

चीन पर अमेरिकी वोटर डेटा जुटाने के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं। वर्ष 2020 की एक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया था कि चीनी खुफिया एजेंसियों ने जनमत विश्लेषण के उद्देश्य से कई अमेरिकी राज्यों के वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा का अध्ययन किया था। इस रिपोर्ट का एक हिस्सा वर्ष 2022 में सार्वजनिक किया गया था।

अदालतों और जांच एजेंसियों को नहीं मिले सबूत

ट्रंप और उनके सहयोगियों की ओर से 2020 के चुनाव परिणामों को चुनौती देते हुए 60 से अधिक मुकदमे दायर किए गए थे, लेकिन किसी भी मामले में ऐसा फैसला नहीं आया जिससे चुनाव नतीजों को प्रभावित करने वाली धोखाधड़ी साबित हुई हो। दोबारा मतगणना, विभिन्न ऑडिट और अमेरिकी न्याय विभाग की जांच में भी ऐसी कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई।

‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करने की मांग

अपने संबोधन में ट्रंप ने अमेरिकी संसद से ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करने की अपील की। उन्होंने इसे चुनाव सुधार की दिशा में जरूरी कदम बताते हुए कहा कि इससे चुनाव प्रणाली अधिक सुरक्षित बनेगी। साथ ही उन्होंने मेल-इन बैलेट व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और इस प्रक्रिया पर लगभग पूरी तरह रोक लगाने की वकालत की।

vineet verma

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