वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में इस वक्त भारी उथल-पुथल मची है। एक तरफ अमेरिका ईरान के साथ युद्ध (Iran War) की स्थितियों से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ व्हाइट हाउस के भीतर ‘इस्तीफों और बर्खास्तगी’ का दौर शुरू हो गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप अपनी कैबिनेट में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल करने जा रहे हैं।
अटलांटिक न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले FBI डायरेक्टर काश पटेल को पद छोड़ना पड़ सकता है। उनके साथ ही आर्मी सेक्रेटरी और लेबर सेक्रेटरी पर भी गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
- इन दिग्गजों पर गिरी गाज (या गिरने वाली है) : व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से जो लिस्ट सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। ट्रंप प्रशासन में अब इन चेहरों की जगह खतरे में है:
- काश पटेल (FBI डायरेक्टर): ट्रंप के बेहद करीबी होने के बावजूद अब उनके भविष्य पर तलवार लटक रही है।
- डैनियल ड्रिस्कॉल (आर्मी सेक्रेटरी): रक्षा विभाग में बड़े बदलावों के बीच इन्हें हटाया जा सकता है।
- लोरी चावेज़-डेरेमर (लेबर सेक्रेटरी): नीतिगत मतभेदों के कारण चर्चा में हैं।
- जनरल रैंडी जॉर्ज: डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ को पहले ही पद से हटा दिया है।
- जो केंट: नेशनल डायरेक्टर के पद से इनकी भी विदाई हो चुकी है।
- पाम बोंडी और क्रिस्टी नोएम की विदाई ने सबको चौंकाया
- हाल ही में पूर्व अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम को हटाए जाने के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप अब किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाम बोंडी को हटाने के पीछे ‘एपस्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) का सही से निपटारा न कर पाना एक बड़ी वजह रही। ट्रंप जस्टिस डिपार्टमेंट पर पूर्ण नियंत्रण चाहते थे, और फाइलों को सार्वजनिक करने में देरी से वह नाराज थे। ट्रंप ने बोंडी को भेजे संदेश में स्पष्ट कहा कि “देरी हमारी साख खत्म कर रही है।”
- क्यों टूटा ट्रंप का ‘No Scalps’ नियम? : अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रंप ने कसम खाई थी कि वह किसी को नौकरी से नहीं निकालेंगे (No Scalps Rule)। वह इसे मीडिया और विपक्ष के सामने अपनी हार मानते थे। लेकिन अब समीकरण बदल चुके हैं:
ईरान युद्ध का असर
ईरान के साथ शुरू हुए युद्ध के बाद से ट्रंप की लोकप्रियता (Approval Rating) में गिरावट आई है। राजनीतिक दबाव को कम करने के लिए वह अब कड़े फैसले ले रहे हैं।
मध्यावधि चुनाव (Midterms): पहले योजना थी कि चुनाव के बाद बदलाव किए जाएंगे, लेकिन गिरती साख ने ट्रंप को समय से पहले एक्शन लेने पर मजबूर कर दिया है।
वफादारी बनाम परफॉरमेंस: ट्रंप अब केवल वफादारी नहीं, बल्कि त्वरित परिणाम (Quick Results) चाहते हैं।
- क्या है आगे की रणनीति? : लांकि ट्रंप ने अभी तक इन सभी नामों पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है, लेकिन व्हाइट हाउस के गलियारों में हलचल तेज है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में अमेरिका की सुरक्षा और न्याय प्रणाली में नए चेहरों की एंट्री होगी, जो सीधे तौर पर ट्रंप के एजेंडे को ‘युद्ध स्तर’ पर लागू करेंगे।
ट्रंप का यह ‘क्लीनअप ऑपरेशन’ संकेत है कि वह अपनी गिरती रेटिंग्स को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। काश पटेल जैसे दिग्गजों की विदाई ट्रंप प्रशासन के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकती है।