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यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए ट्रंप का बड़ा दांव! रूस के साथ तेल कारोबार बहाल करने की तैयारी, यूरोप की बढ़ सकती है मुश्किल

अमेरिका-रूस बिजनेस डील: डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए रूस के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। प्रस्तावों में सखालिन तेल परियोजना दोबारा शुरू करने, यूरोप को रूसी तेल की आपूर्ति बहाल करने और टाइटेनियम उत्पादन में सहयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, इन समझौतों को युद्ध खत्म होने के बाद लागू करने की बात कही जा रही है।

नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब कूटनीति के साथ कारोबार का रास्ता भी तलाश रहे हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और रूस के बीच तेल कारोबार दोबारा शुरू करने और कई औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत चल रही है। प्रस्तावों में अमेरिकी कंपनियों की रूस की तेल इंडस्ट्री में वापसी और यूरोप को रूसी तेल की आपूर्ति फिर शुरू करने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।

इस संभावित कारोबारी पहल को ट्रंप की उस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध समाप्त करने के लिए शांति समझौते पर सहमत करना चाहते हैं। हालांकि, रूस के साथ अमेरिकी कारोबारी रिश्ते बहाल करने की कोशिश यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

तेल से लेकर उद्योगों तक, रूस के साथ बड़े समझौते की तैयारी

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और रूस के बीच जिन प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है, उनमें रूस के सुदूर पूर्व में सखालिन के पास स्थित तेल परियोजना को दोबारा शुरू करना और द्रुजबा पाइपलाइन के जरिए यूरोप को रूसी तेल की आपूर्ति बहाल करना शामिल है।

रूस के ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की संभावित वापसी को भी इस पहल का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसके अलावा, दोनों देश टाइटेनियम उत्पादन में सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। टाइटेनियम विमान निर्माण सहित कई महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली धातु है।

इन प्रस्तावों का उद्देश्य केवल ऊर्जा कारोबार तक सीमित नहीं है। अमेरिकी एयरलाइंस को रूसी हवाई क्षेत्र से दोबारा उड़ान भरने की अनुमति देने के विकल्प पर भी चर्चा हुई है। इससे कुछ अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों पर उड़ान का समय और ईंधन खर्च कम हो सकता है।

हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर अभी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित कारोबारी समझौतों को युद्ध समाप्त होने के बाद लागू करने की योजना है।

पुतिन से बातचीत में विटकॉफ की भूमिका, शांति समझौते पर नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने सितंबर की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान इन कारोबारी प्रस्तावों पर चर्चा की थी। विटकॉफ रियल एस्टेट कारोबारी रह चुके हैं और रूस के साथ बातचीत में उनकी भूमिका को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस भी होती रही है।

डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दलों के कुछ नेताओं ने विटकॉफ के रवैये की आलोचना की है। आलोचकों का आरोप है कि वह पुतिन के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम रुख अपनाते हैं।

अमेरिका को उम्मीद है कि रूस, यूक्रेन और अमेरिकी अधिकारियों के बीच अबू धाबी में शांति वार्ता आगे बढ़ सकती है। कारोबारी सहयोग के प्रस्तावों को भी संभावित शांति योजना से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, वार्ता की स्थिति और प्रस्तावों पर अंतिम सहमति को लेकर आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

रूस में एक्सॉनमोबिल की वापसी पर अब भी संशय

रूस के साथ तेल कारोबार बहाल करने की किसी भी योजना के सामने सबसे बड़ा सवाल अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी का है। सखालिन तेल परियोजना में शामिल अमेरिकी कंपनी एक्सॉनमोबिल ने पहले रूस में दोबारा काम शुरू करने की योजना से इनकार किया था।

अब यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी ने अपने रुख में कोई बदलाव किया है या नहीं। ऐसे में रूस के ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की वापसी का प्रस्ताव फिलहाल संभावित कारोबारी योजना के तौर पर ही देखा जा रहा है।

रूस के तेल और गैस क्षेत्र पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच इस तरह के समझौतों को लागू करना भी आसान नहीं होगा। इसके लिए राजनीतिक सहमति के साथ संबंधित प्रतिबंधों और कारोबारी नियमों पर भी फैसला करना पड़ सकता है।

रूस से नजदीकी बढ़ने पर यूक्रेन क्यों हो सकता है नाराज?

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से मॉस्को पश्चिमी देशों के व्यापक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। ऐसे में अमेरिका और रूस के बीच आर्थिक रिश्ते बहाल करने की कोशिश यूक्रेन के लिए संवेदनशील मुद्दा है।

यूक्रेन लगातार रूस के ऊर्जा ठिकानों और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन हमलों का इस्तेमाल कर रहा है। कीव की रणनीति रूस की युद्ध संबंधी आर्थिक और ऊर्जा क्षमताओं को कमजोर करने की है। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन की ओर से यूक्रेन पर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने का दबाव बढ़ाए जाने की खबरें सामने आई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से डीजल खरीदने के एक समझौते को मंजूरी देने और रूसी ऊर्जा निर्यात पर नए प्रतिबंधों को लेकर अमेरिकी रुख में बदलाव ने भी यूक्रेन तथा उसके यूरोपीय सहयोगियों की चिंताएं बढ़ाई हैं।

यूक्रेन को अमेरिकी खुफिया जानकारी की उपलब्धता और स्टारलिंक सेवा तक उसकी पहुंच को लेकर उठे सवालों ने भी ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के रिश्तों को प्रभावित किया है।

यूरोप के सामने ऊर्जा सुरक्षा की नई चुनौती

अमेरिका और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार दोबारा शुरू होने की संभावना यूरोप के लिए भी अहम है। रूस से तेल की आपूर्ति बहाल होने पर कुछ देशों और कंपनियों को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत मिल सकते हैं। लेकिन इससे यूरोप की रूस पर ऊर्जा निर्भरता और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को लेकर बहस भी तेज हो सकती है।

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर ने मंगलवार को पुतिन से करीब 90 मिनट तक फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने युद्ध रोकने, तनाव कम करने और यूक्रेन को समर्थन देने के मुद्दे उठाए।

वहीं, क्रेमलिन के मुताबिक, पुतिन ने युद्ध लंबा खिंचने के लिए यूक्रेन के सहयोगी देशों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।

क्या कारोबार के जरिए युद्ध रुकवा पाएंगे ट्रंप?

अमेरिका और रूस के बीच संभावित कारोबारी समझौतों से संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन युद्ध समाप्त कराने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन का विकल्प भी तलाश रहा है। रूस को ऊर्जा और उद्योगों में सहयोग की संभावना दिखाकर बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की जा सकती है।

लेकिन इस रणनीति की सफलता कई सवालों पर निर्भर करेगी। क्या पुतिन युद्ध समाप्त करने के लिए ठोस शर्तों पर सहमत होंगे? क्या यूक्रेन ऐसे किसी समझौते को स्वीकार करेगा? और क्या अमेरिका तथा यूरोपीय देश रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में बदलाव के लिए तैयार होंगे?

फिलहाल, रूस के साथ संभावित कारोबारी समझौतों पर बातचीत की खबरें सामने आई हैं, लेकिन इन्हें अंतिम समझौता मानना जल्दबाजी होगी। असली चुनौती यह होगी कि आर्थिक सहयोग की पेशकश को यूक्रेन में स्थायी शांति में कैसे बदला जाए।

news desk

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