अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में खुद को बार-बार “शांति का राष्ट्रपति” बताते रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने दुनिया भर में कम से कम आठ बड़े संघर्ष खत्म कराए और इसी आधार पर नोबेल शांति पुरस्कार की उम्मीद भी जताते रहे। लेकिन अब हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि ट्रंप खुद एक नए युद्ध की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हालिया बयान में ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका जल्द ही लैटिन अमेरिका में ड्रग तस्करी के ठिकानों पर जमीनी हमले शुरू करेगा, और यह कार्रवाई सिर्फ वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहेगी।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमने समुद्री रास्ते से आने वाली 96 प्रतिशत ड्रग्स को रोक दिया है। अब जमीन पर कार्रवाई शुरू होगी। जो लोग हमारे देश में ड्रग्स ला रहे हैं, वे सभी निशाने पर हैं।” हालांकि उन्होंने हमलों की कोई तारीख नहीं बताई, लेकिन उनके इस बयान को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बढ़ाने की रणनीति माना जा रहा है। अमेरिका लंबे समय से मादुरो सरकार पर ड्रग तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाता रहा है, जिसे वेनेजुएला लगातार खारिज करता आया है।
समुद्र से जमीन तक बढ़ता टकराव
इस टकराव की जड़ें सितंबर 2025 में दिखाई देने लगी थीं, जब अमेरिकी नौसेना ने कैरेबियन सागर में कथित ड्रग तस्करी वाली नावों पर हवाई हमले शुरू किए। अब तक 20 से ज्यादा ऐसे हमलों में 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका इन्हें “नार्को-टेररिज्म” के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ इन हमलों को अवैध मानते हैं।
तनाव तब और बढ़ गया, जब 10 दिसंबर को अमेरिकी कोस्ट गार्ड और नौसेना ने वेनेजुएला के तट के पास एक बड़े ऑयल टैंकर ‘स्किपर’ को जब्त कर लिया। यह टैंकर प्रतिबंधित वेनेजुएला क्रूड ऑयल ले जा रहा था। ट्रंप ने इसे “अब तक की सबसे बड़ी जब्ती” बताया और कहा कि जब्त तेल अमेरिका रखेगा। जवाब में वेनेजुएला ने इस कार्रवाई को “अंतरराष्ट्रीय समुद्री डकैती” करार दिया। इस घटना के बाद वैश्विक तेल कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी देखी गई।
‘शांति के दावे’ और युद्ध की हकीकत
ट्रंप का यह रुख उनकी विदेश नीति की उस विडंबना को उजागर करता है, जहां शांति के बड़े-बड़े दावे तो किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत अलग रही। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रुवांडा, पाकिस्तान-भारत, इजरायल-ईरान, आर्मेनिया-अजरबैजान, मिस्र-इथियोपिया और गाजा जैसे संघर्ष खत्म कराए। लेकिन इनमें से कई जगहों पर शांति टिक नहीं पाई। कंबोडिया-थाईलैंड सीमा पर फिर से हिंसा भड़क चुकी है, कोसोवो-सर्बिया विवाद जस का तस है और गाजा समझौते में भी गंभीर खामियां सामने आई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की ज्यादातर “शांति डील्स” दिखावटी रहीं और मूल समस्याओं को हल करने में नाकाम साबित हुईं। मध्य पूर्व में ‘सदी की डील’ हो या ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका का बाहर निकलना—इन फैसलों ने हालात को और जटिल ही बनाया।
अब वेनेजुएला पर जमीनी हमलों की धमकी देकर ट्रंप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ाने की दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं। मादुरो ने अमेरिकी कदमों को “साम्राज्यवादी हमला” बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर विदेशी सैनिक उनकी जमीन पर उतरे तो “सामान्य विद्रोह” होगा। उन्होंने रूस और चीन जैसे सहयोगियों से समर्थन भी मांगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका वाकई जमीनी हमले करता है, तो इससे पूरे लैटिन अमेरिका में अस्थिरता बढ़ सकती है और यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। ऐसे में सवाल यही है—क्या ट्रंप की यह रणनीति ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक लड़ाई साबित होगी, या फिर ‘शांति के राष्ट्रपति’ के दावे पर एक और बड़ा सवालिया निशान लग जाएगा? दुनिया की नजरें अब इसी पर टिकी हैं।