नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान की तरफ से एक अनोखा “गिफ्ट” मिला है। ट्रंप ने खुद इसका दावा किया और कहा कि यह तोहफा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मंगलवार, 24 मार्च को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “ईरान ने कल जो भेजा वह वास्तव में अद्भुत था। यह तोहफा हमें आज मिला और इसकी कीमत बहुत ज्यादा है। मेरे लिए इसका मतलब यह है कि हम सही लोगों से बात कर रहे हैं।”
ईरान-यूएस वार्ता और होर्मुज का महत्व
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को काफी हद तक बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी आई। ट्रंप के दावे के बाद, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने स्पष्ट किया कि होर्मुज से गुजरने वाले गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20% तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है।
ईरान ने पहले ही संकेत दिया था कि वह मित्र देशों को निशाना नहीं बना रहा है, हालांकि बीमा कंपनियों ने जोखिम के कारण कई जहाजों को दूर रहने की सलाह दी है।
ट्रंप का दावा: ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने बातचीत जारी रहने के कारण कोई नई सैन्य कार्रवाई नहीं की। उन्होंने ईरान की नौसेना और वायु सेना कमजोर होने का दावा किया और कहा कि अमेरिकी बल अब “जो चाहें कर सकते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने ईरान के बड़े बिजली संयंत्रों पर हमले की योजना को रोक दिया क्योंकि बातचीत चल रही थी।
अमेरिका की तैयारी: बातचीत के बावजूद सैनिक तैनात
हालांकि ट्रंप ने कूटनीति की उम्मीद जताई, द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने प्रतिष्ठित 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 3,000 सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत के बावजूद अमेरिका बड़े हमले की संभावना से इनकार नहीं कर सकता।
याद रहे कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने बड़े हमले शुरू करने से केवल दो दिन पहले ट्रंप के दूत ईरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या की खबर भी सामने आई थी।