राज्यसभा चुनाव: तृणमूल का बड़ा दांव, बाबुल सुप्रियो से लेकर पूर्व डीजीपी और फिल्म स्टार तक मैदान में

कोलकाता/नई दिल्ली। आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को अपने पत्ते खोल दिए। पार्टी ने चार ऐसे नामों का ऐलान किया है, जिनमें राजनीति, प्रशासन, कानून और कला—चारों क्षेत्रों का संतुलन साफ नजर आता है। इस लिस्ट में मंत्री बाबुल सुप्रियो, पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और बांग्ला सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री कोयल मल्लिक शामिल हैं। पार्टी के इस कदम को बंगाल की आवाज को संसद के उच्च सदन में और मजबूती से रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

बाबुल सुप्रियो और नए चेहरों पर दांव

बाबुल सुप्रियो पहले ही केंद्र में मंत्री रह चुके हैं और फिलहाल बंगाल सरकार में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, ऐसे में उनका नाम कोई चौंकाने वाला नहीं माना जा रहा। वहीं पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को टिकट देना राजनीतिक हलकों में खास चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय तक राज्य पुलिस के मुखिया रहे राजीव कुमार का नाम सारधा और रोजवैली चिटफंड मामलों की जांच के दौरान विवादों में रहा था। 2019 में जब सीबीआई उनसे पूछताछ करने पहुंची थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद उनके समर्थन में धरने पर बैठ गई थीं और इसे ‘संविधान बचाने की लड़ाई’ बताया गया था।

कानून के मोर्चे पर पार्टी ने मेनका गुरुस्वामी को उतारकर साफ संदेश दिया है कि वह संवैधानिक अधिकारों और न्यायपालिका से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना चाहती है। वहीं कोयल मल्लिक को टिकट देकर तृणमूल ने कला और जनसंपर्क की दुनिया से भी एक लोकप्रिय चेहरा जोड़ लिया है।

राजनीतिक संदेश और पुराने विवाद

पार्टी का कहना है कि ये चारों उम्मीदवार उसकी उस सोच को आगे बढ़ाएंगे, जो आम लोगों के अधिकारों और भारतीय लोकतांत्रिक गरिमा की रक्षा पर टिकी है। हालांकि राजीव कुमार को लेकर पुराने विवाद फिर से सुर्खियों में हैं। चिटफंड मामलों में सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप, सीबीआई और बाद में ईडी के साथ टकराव—ये सब बातें एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में राजनीतिक सलाहकार फर्म ‘आई-पैक’ से जुड़े मामले में ईडी की कार्रवाई के दौरान भी बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला था, जिस पर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति जताई थी।

कुल मिलाकर, तृणमूल कांग्रेस की यह सूची साफ संकेत देती है कि पार्टी राज्यसभा में सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक, कानूनी और सांस्कृतिक आवाज को भी एक साथ मजबूत करना चाहती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि ये चेहरे संसद के उच्च सदन में बंगाल की राजनीति को किस तरह नई धार देते हैं।

news desk

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