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मथुरा का वो कस्बा जहां सुहागिने नहीं रखती है करवाचौथ का व्रत! सती के श्राप से जुड़ी है 200 साल पुरानी मान्यता

शुक्रवार को जब देशभर की सुहागन महिलाएं करवाचौथ पर व्रत रखी हैं, चांद को निहारती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. तब मथुरा के एक छोटे से कस्बे के इस गांव की महिलाएं इस दिन चुपचाप, बिना श्रृंगार और बिना व्रत के ही गुज़ार देती हैं. क्योंकि इस गांव में सुहागिनों के लिए करवाचौथ का वत्र रखना मना है. अजीब है लेकिन इस परंपरा के पीछे एक करीब 200 साल पुरानी एक कहानी है. एक ऐसी सती का श्राप से जुड़ी हुई है.

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“हम करवाचौथ को मानते हैं, पति की लंबी उम्र की दुआ भी करते हैं. लेकिन व्रत नहीं रखते. न श्रृंगार करते हैं, न चांद देखते हैं. बचपन से देखा है यही परंपरा. शादी के बाद जब पहली बार करवाचौथ नहीं मनाया, तो बहुत अजीब लगा’

क्या है सती की कहानी?

करीब 200 साल पहले रामनगला गांव का एक ब्राह्मण युवक अपनी नवविवाहिता पत्नी को गौना कराकर सुरीर गांव लेकर जा रहा था. लेकिन रास्ते में सुरीर गांव के कुछ ठाकुर जाति के युवकों से उस लड़के का झगड़ा हो गया. जिसमें विवाहित युवक की मौत हो गई. अपने पति की मौत से बौखलाई उसकी नवविवाहिता पत्नी ने वहीं सती हो जाने का संकल्प ले लिया. लेकिन सती होने से पहले उसने उस क्षेत्र के लोगों को एक श्राप दे डाला की अगर यहां की औरतें अब आगे कभी भी सुहाग पर्व मनाएंगी तो उनके पति जीवित नहीं रहेंगे. बस उस दिन से लेकर आज तक सुरीर कस्बे के वघा मोहल्ले की सुहागिनें करवाचौथ का व्रत नहीं रखती.

श्राप से आशीर्वाद तक: नजरिया बदला, लेकिन परंपरा कायम

आज के समय में, जब मोबाइल से लेकर मंगलयान तक हर चीज़ बदल रही है, सुरीर का ये मोहल्ला अपनी मान्यता पर अब भी अडिग है. यहां के लोग अब इसे श्राप नहीं, बल्कि ‘सती माता का आशीर्वाद’ मानते हैं. मान्यता है कि इस परंपरा को निभाने से ही घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

सुरीर में आज भी एक प्राचीन सती माता मंदिर मौजूद है, जहां शादी-ब्याह और अन्य शुभ कार्यों पर श्रद्धालु मत्था टेकने ज़रूर आते हैं. इतना ही नहीं, रामनगला गांव के कुछ लोग आज भी सुरीर में भोजन तक नहीं करते, ताकि सती माता की मर्यादा बनी रहे.

परंपरा या अंधविश्वास?

यह सवाल जरूर उठता है कि क्या यह एक डर है या आस्था? लेकिन जब कोई परंपरा 200 सालों से निभाई जा रही हो, तो वह सिर्फ नियम नहीं, लोगों की सोच का हिस्सा बन जाती है. सुरीर का ये वघा मोहल्ला आज भी करवाचौथ के दिन, बिना चूड़ी-बिंदी और बिना व्रत के, सिर्फ एक शांत दुआ के साथ पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करता है.

इंडियन प्रेस हाउस किसी भी प्रकार के अंधविश्वास, अफवाह या तथ्यहीन विश्वासों को मान्यता नहीं देता है.

news desk

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