क्या Reza Pahlavi का ‘सत्ता सपना’ ठंडे बस्ते में?
नई दिल्ली। United States और Iran के बीच हुए सीजफायर ने जहां वैश्विक स्तर पर राहत की भावना पैदा की है, वहीं इस घटनाक्रम ने ईरान की राजनीति के एक अहम चेहरे निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi—की रणनीति पर बड़ा असर डाला है।
दरअसल, हालिया संघर्ष के दौरान पहलवी ने जिस तरह खुद को ईरान में संभावित बदलाव के चेहरे के तौर पर पेश किया था, अब सीजफायर के बाद उस पूरी रणनीति पर ब्रेक लगते दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंग की स्थिति उनके लिए एक राजनीतिक अवसर बन सकती थी, लेकिन संघर्षविराम ने हालात को पूरी तरह बदल दिया है।
जंग के बीच ‘सत्ता परिवर्तन’ की उम्मीद
संघर्ष के दौरान Reza Pahlavi लगातार ईरान में शासन परिवर्तन की बात करते रहे। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि वह देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने के लिए नेतृत्व करने को तैयार हैं।
उनके कई बयानों में यह संकेत भी मिला कि मौजूदा नेतृत्व, यानी Ali Khamenei की पकड़ कमजोर पड़ रही है और सत्ता परिवर्तन संभव है। यही नहीं, उन्होंने ईरान को भविष्य में अमेरिका का रणनीतिक साझेदार बनाने की बात भी दोहराई थी।
ट्रंप मॉडल से प्रेरित बयानबाज़ी
पहलवी ने अपने संदेशों में Donald Trump का उदाहरण देते हुए कहा था कि जैसे अमेरिका को “फिर से महान” बनाने की बात हो रही है, वैसे ही वह भी ईरान को नई दिशा देना चाहते हैं।
यह बयान स्पष्ट रूप से उनके राजनीतिक विज़न और अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने की कोशिश को दर्शाता था।
सुरक्षाबलों से सीधा संवाद
सीजफायर से ठीक पहले पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक अहम अपील जारी की थी। उन्होंने ईरान के सुरक्षाबलों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देशभक्ति की परंपरा के वारिस हैं और उन्हें देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए।इस अपील को विश्लेषक एक तरह से सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर समर्थन जुटाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

सीजफायर के बाद ईरान में तत्काल राजनीतिक अस्थिरता की संभावना कम हो गई है। ऐसे में बाहरी समर्थन के सहारे सत्ता परिवर्तन की जो संभावनाएं बन रही थीं, वे फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही हैं।
सीजफायर से क्यों बदला पूरा खेल?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक ईरान के भीतर व्यापक जनआंदोलन या सत्ता ढांचे में बड़ा बदलाव नहीं होता, तब तक Reza Pahlavi के लिए सक्रिय भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
सीजफायर ने फिलहाल युद्ध को विराम जरूर दिया है, लेकिन ईरान की आंतरिक राजनीति और नेतृत्व को लेकर बहस जारी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पहलवी अपनी रणनीति में बदलाव करते हैं या फिर किसी नए मौके का इंतजार करते हैं।