नई दिल्ली। टेक दिग्गज मेटा (Meta) की मुश्किलें भारत में तेजी से बढ़ती नजर आ रही हैं। फेसबुक (Facebook) पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक आधिकारिक वीडियो करीब 5 घंटे तक हटाए रखने के मामले को भारत सरकार और संसदीय समिति ने बेहद गंभीरता से लिया है।
संचार और आईटी मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया दिग्गज को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि मेटा CEO मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) को इस गलती के लिए माफी मांगनी होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो भारत में मेटा के कानूनी सुरक्षा कवच ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour Protection) को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
संसदीय समिति की 3 घंटे से अधिक चली उच्चस्तरीय बैठक में मेटा के अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे गए। बीजेपी सांसद और समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि और देश के प्रधानमंत्री का वीडियो 5 घंटे (रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक) के लिए हटा देना सामान्य तकनीकी चूक नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमले जैसा है।
मेटा की ओर से इसे ‘एल्गोरिद्म की गलती’ और ‘तकनीकी खराबी’ बताकर माफी मांगी गई, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) और संसदीय समिति दोनों ने अपर्याप्त और असंतोषजनक करार दिया है।
सूचना प्रौद्योगिकी (IT Act) की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, यूट्यूब, एक्स, गूगल) को ‘सेफ हार्बर’ यानी कानूनी ढाल प्राप्त है। इसके तहत यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई किसी भी गैर-कानूनी या विवादित सामग्री के लिए टेक कंपनियों और उनके अधिकारियों के खिलाफ सीधे आपराधिक केस दर्ज नहीं किया जा सकता।
अगर सेफ हार्बर हटता है तो क्या होगा?
संसदीय पैनल ने केवल प्रधानमंत्री के वीडियो पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। समिति ने मेटा, गूगल, यूट्यूब, एक्स (X), इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे सभी बड़े प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि:
मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। तेलंगाना में भी फर्जी और एआई-मॉर्फ्ड (AI-Morphed) कंटेंट को लेकर गूगल और मेटा इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी है।
संसदीय समिति ने बिग टेक कंपनियों के एल्गोरिद्म (Algorithm) पर भी सवाल उठाए हैं। निशिकांत दुबे के अनुसार, कंपनियों का एल्गोरिद्म राजनीतिक कंटेंट को नियंत्रित करने और नए या अराजक तत्वों के रीच को बढ़ाने में पक्षपात कर रहा है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
मेटा से 10 दिनों के भीतर लिखित में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि मार्क जुकरबर्ग की ओर से आधिकारिक माफी नहीं आती है और समिति के निर्देशों का पालन नहीं होता है, तो भारत सरकार IT Act की धारा 79 को वापस लेने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा सकती है।
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