आज के दौर में दुनिया का सबसे खतरनाक दुश्मन कोई मिसाइल नहीं, बल्कि एक छोटा सा पाउडर है जिसका नाम है “फेंटेनाइल”। ये ‘सिंथेटिक ड्रग’ अमेरिका के लिए एक ऐसी नेशनल इमरजेंसी बन चुका है, जिसने हज़ारों परिवारों को उजाड़ दिया है। मेक्सिको के रास्ते आने वाले इस नशे ने अब दो पड़ोसी देशों के बीच एक बड़ी ‘कोल्ड वॉर’ शुरू कर दी है।

क्या कहते हैं नंबर?
फेंटेनाइल का असर कितना घातक है, इसे इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:
अमेरिका में औसतन हर रोज़ 200 से ज़्यादा लोग सिर्फ फेंटेनाइल के ओवरडोज़ से अपनी जान गंवा रहे हैं। पिछले एक साल (2025) में करीब 75,000 अमेरिकियों की मौत का कारण यह ज़हर बना है। यह आंकड़ा किसी भी युद्ध में होने वाली मौतों से कहीं ज़्यादा है।

अमेरिकी बॉर्डर सिक्योरिटी (CBP) ने 2025 में लगभग 11,500 पाउंड फेंटेनाइल ज़ब्त किया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी सिर्फ 2 मिलीग्राम मात्रा (नमक के एक दाने जितनी) किसी की भी जान लेने के लिए काफी है।
मेक्सिको के साथ अमेरिका की ‘बड़ी मुश्किल’
अमेरिका और मेक्सिको के बीच इस समय जबरदस्त खींचतान चल रही है। इसके पीछे की असली कहानी ये है:
मेक्सिको के बड़े ड्रग माफिया (जैसे ‘एल मेंचो’ के ग्रुप) चोरी-छिपे फेंटेनाइल की छोटी-छोटी लैब चलाते हैं। हाल ही में इन माफियाओं के खिलाफ बड़े एक्शन हुए हैं, जिससे मेक्सिको में हिंसा काफी बढ़ गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर मेक्सिको और कनाडा ने अपने बॉर्डर से फेंटेनाइल की तस्करी नहीं रोकी, तो उनके सामान पर 25% एक्स्ट्रा टैक्स लगा दिया जाएगा। इससे मेक्सिको की अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है।

अमेरिका अब इन ड्रग ग्रुप्स को ‘आतंकी संगठन’ की कैटेगरी में डालने की तैयारी कर रहा है। चर्चा ये भी है कि अमेरिका अपनी सेना का इस्तेमाल करके मेक्सिको के अंदर चल रही इन अवैध लैब्स को सीधे तबाह कर सकता है।

ये ड्रग ‘पॉपुलर’ और खतरनाक क्यों है?
फेंटेनाइल के पीछे की सबसे गंदी बात यह है कि ये बहुत सस्ता है। ड्रग माफिया इसे हेरोइन या नार्मल पैन किलर्स गोलियों में मिला देते हैं। लेने वाले को पता भी नहीं चलता कि वो मौत की खुराक ले रहा है। इसे अब अमेरिका में “Weapon of Mass Destruction” (सामूहिक विनाश का हथियार) कहा जा रहा है क्योंकि यह बिना गोली चलाए पूरी पीढ़ी को खत्म कर रहा है।
फेंटेनाइल अब सिर्फ एक नशे का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि एक बड़ी राजनीतिक जंग बन चुका है। एक तरफ मेक्सिको में माफियाओं के सफाए की कोशिश जारी है, तो दूसरी तरफ अमेरिका अपने बॉर्डर्स को पूरी तरह सील करने में लगा है। आने वाले कुछ महीने तय करेंगे कि क्या ये ‘सफेद ज़हर’ रुकेगा या दुनिया को और बड़े संकट में डालेगा।