देश में चल रही मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर अब सवाल उठ रहे हैं. सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग की कार्यशैली, मतदाता सूची से नाम कटने की आशंकाओं और बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर बढ़ते दबाव को लेकर तीखी बहस जारी है.
बिहार में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद अब उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में इसे तेजी से लागू किया जा रहा है, जिससे BLO कर्मचारियों का कार्यभार और बढ़ गया है।
इस प्रक्रिया के चलते BLO कर्मचारियों पर दबाव इतना बढ़ गया है कि उन्हें भारी तनाव का सामना करना पड़ रहा है. बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक BLO से जुड़ी कई खबरें सामने आ रही हैं.
अब तक देश के अलग-अलग राज्यों में 11 BLO कर्मचारियों की विभिन्न कारणों से मौत हुई है. इस मामले पर चुनाव आयोग ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या ठोस जानकारी नहीं दी है.देश में BLO कर्मचारियों की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है और कई पत्रकार इस पर खुलकर बहस कर रहे हैं.
जहां एक ओर बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने इस मामले पर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं.
मध्य प्रदेश में 10 दिनों में 6 BLO की मौत
मध्य प्रदेश में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान BLO कर्मचारियों की मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल पिछले दस दिनों में छह BLO अपनी जान गंवा चुके हैं. इसके अलावा दर्जन भर अन्य BLO काम के दबाव, लंबे शिफ्ट, देर रात तक रिपोर्टिंग और सस्पेंशन के डर जैसी वजहों से गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है.हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है। प्रशासन का दावा है कि मरने वाले BLO पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, और उनकी मौत का मुख्य कारण यही था.
पश्चिम बंगाल में BLO मौतों का मामला
पश्चिम बंगाल में भी BLO कर्मचारियों की मौतों का मामला चिंता का विषय बन गया है. ममता सरकार लगातार चुनाव आयोग पर दबाव डाल रही है और इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दे रही है. राज्य में लगातार BLO के मरने की खबरें सामने आ रही हैं और यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है.SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई के दौरान, पश्चिम बंगाल याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि राज्य में SIR के दौरान अब तक 23 BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की मौत हो चुकी है. इस गंभीर आरोप पर कोर्ट ने पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव कार्यालय से 1 दिसंबर तक लिखित जवाब तलब किया है.
यूपी में BLO विवाद और तनाव
उत्तर प्रदेश में BLO कर्मचारियों को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। अखिलेश यादव लगातार चुनाव आयोग पर हमलावर हैं, वहीं राज्य में कर्मचारियों के बीच भारी दबाव का मामला सामने आ रहा है.
ताजा मामला फतेहपुर का है, जहां एक अधिकारी ने खुदकुशी कर ली।初 रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें राज्य में चल रहे वोटर रोल के Special Intensive Revision (SIR) से जुड़ी मीटिंग में शामिल न होने पर सस्पेंड कर दिया गया था.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अधिकारी ने शादी से ठीक एक दिन पहले यह कदम उठाया. मृतक की बहन ने लिखा कि उसने लिखा, “तब से, मेरा भाई मानसिक रूप से परेशान था.” उसने आरोप लगाया कि फिर एक अधिकारी मंगलवार सुबह कुमार के घर आया और उसे बताया कि उसे सस्पेंड कर दिया गया है.
गुजरात: गिर सोमनाथ के BLO अरविंद वाढ़ेर ने 20 नवंबर को कथित सुसाइड किया. खेड़ा जिले में 19 नवंबर को BLO रमेशभाई परमार की दिल का दौरा पड़ने से मौत. सूरत में 26 साल की BLO डिंकल सिंगोडावाला मृत पाई गईं, संभावना जहरीली गैस के कारण.
राजस्थान: सवाई माधोपुर में 19 नवंबर को BLO हरिओम बैरवा का कार्डियक अरेस्ट से निधन। जयपुर में सरकारी स्कूल टीचर मुकेश जांगिड़ (45) ने कथित सुसाइड की, परिवार का आरोप-SIR का काम और समय सीमा का दबाव.
केरल: कन्नूर जिले में 17 नवंबर को BLO अनीश जॉर्ज का शव मिला; पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया.
सुप्रीम कोर्ट: तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और बिहार में चल रहे SIR के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने चुनाव आयोग को 1 दिसंबर तक जवाब देने का निर्देश दिया. केरल मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर और बाकी राज्यों की 9 दिसंबर को होगी.