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देश सूखे की मार झेल रहा, लेकिन मुंबई में आफत बनकर बरस रहा मॉनसून! क्या अल-नीनो ने बिगाड़ दिया बारिश का पूरा संतुलन?

नई दिल्ली: इस बार का मॉनसून देशभर में असमान तस्वीर पेश कर रहा है। एक ओर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बड़े हिस्सों में बारिश की भारी कमी के कारण सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर मुंबई, ठाणे और कोंकण क्षेत्र लगातार मूसलाधार बारिश की चपेट में हैं। इससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल-नीनो और मौसम में बढ़ती अनियमितताओं ने इस बार मॉनसून के संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

देश के कई हिस्सों में किसान फसलों के सूखने की चिंता से जूझ रहे हैं, वहीं मुंबई में सड़कें जलमग्न हैं, रेल सेवाएं प्रभावित हैं और आम लोगों की दैनिक गतिविधियां बाधित हो रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मॉनसून की शुरुआत सामान्य से देर से हुई और इसकी प्रगति व बारिश का वितरण पूरे देश में समान नहीं रहा।

उत्तर और पश्चिम भारत में बारिश का बड़ा घाटा

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में मॉनसून की रफ्तार धीमी रही है। इन इलाकों में सामान्य से 40 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत पश्चिमी तट, विशेषकर मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में मॉनसून अत्यधिक सक्रिय बना हुआ है। नतीजतन देश के कुछ हिस्से सूखे की चपेट में हैं तो कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।

क्या अल-नीनो बना सबसे बड़ी वजह?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष अल-नीनो का प्रभाव मॉनसून पर साफ दिखाई दे रहा है। अल-नीनो ऐसी स्थिति है, जब प्रशांत महासागर का पूर्वी हिस्सा सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे भारत में सामान्यतः कम वर्षा होती है। इस बार अल-नीनो के मजबूत होने और ला-नीना के कमजोर पड़ने से मॉनसून का पैटर्न असंतुलित हो गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई जैसे तटीय इलाकों में अरब सागर से लगातार नमी से भरपूर हवाएं पहुंच रही हैं। इन हवाओं को किसी बड़े व्यवधान का सामना नहीं करना पड़ रहा, जिसके कारण लगातार भारी बारिश हो रही है। वहीं देश के अन्य हिस्सों में मॉनसून ट्रफ अभी सामान्य स्थिति तक नहीं पहुंच सकी है।

मुंबई में क्यों नहीं थम रही मूसलाधार बारिश?

विशेषज्ञों के अनुसार मुंबई की भौगोलिक स्थिति भी भारी वर्षा की प्रमुख वजह है। पश्चिमी घाट की पर्वतमालाएं अरब सागर से आने वाली नम हवाओं को ऊपर उठाती हैं। इस प्रक्रिया में हवाएं ठंडी होकर भारी वर्षा करती हैं, जिसे ऑरोग्राफिक लिफ्टिंग कहा जाता है। इस वर्ष हवाओं में नमी और उनकी गति सामान्य से अधिक रहने के कारण वर्षा का सिलसिला लगातार जारी है।

पिछले कुछ दिनों में मुंबई के कई इलाकों में 200 से 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इससे निचले क्षेत्रों में जलभराव, लंबा ट्रैफिक जाम और रेल व हवाई सेवाओं में देरी जैसी समस्याएं सामने आई हैं। हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है।

सूखे से जूझ रहे कई राज्य

राजस्थान के कई जिलों में इस सीजन में औसत से करीब 60 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसके चलते किसान खरीफ फसलों की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। हरियाणा और पंजाब में भी बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। इन राज्यों में कृषि के साथ-साथ पेयजल संकट गहराने की आशंका भी जताई जा रही है।

मध्य और पूर्वी भारत में भी बारिश का वितरण असमान बना हुआ है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य वर्षा हो रही है, जबकि कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर औसत वर्षा सामान्य के आसपास दिखाई देती है, लेकिन क्षेत्रीय असंतुलन काफी अधिक है।

जलवायु परिवर्तन भी बढ़ा रहा चुनौती

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मॉनसून की प्रकृति तेजी से बदल रही है। अब बारिश कम समय में अधिक तीव्रता के साथ सीमित क्षेत्रों में केंद्रित हो रही है। एक स्थान पर अत्यधिक वर्षा और दूसरे स्थान पर लंबे समय तक सूखा जैसी स्थिति देखने को मिल रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है, जिससे वातावरण में नमी भी बढ़ रही है। इसके साथ ही अल-नीनो और ला-नीना जैसे समुद्री तापमान चक्र पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित होते जा रहे हैं, जिससे मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाना चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है।

सरकार और प्रशासन सतर्क

केंद्र सरकार ने सूखा प्रभावित राज्यों में राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। फसल बीमा योजना के तहत किसानों को सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है। वहीं मुंबई में जलभराव से निपटने के लिए पंपिंग स्टेशन सक्रिय कर दिए गए हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक मुंबई और आसपास के इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। साथ ही सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मॉनसून की सक्रियता बढ़ने की संभावना भी जताई गई है।

लोगों के सामने बढ़ीं मुश्किलें

लगातार बारिश के कारण मुंबई में लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर स्कूल-कॉलेज बंद हैं और बिजली तथा पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया, डेंगू और जलजनित बीमारियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

दूसरी ओर सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसान बोरवेल और पानी के टैंकरों पर निर्भर होते जा रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इस तरह के असंतुलित मॉनसून की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, जल संरक्षण, सूखा प्रतिरोधी फसलों और शहरी बाढ़ प्रबंधन जैसी दीर्घकालिक रणनीतियों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता होगी।

 

vineet verma

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