भारतीय IT जगत की सबसे बड़ी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरे कॉर्पोरेट वर्ल्ड को चौंका दिया है। एक तरफ जहाँ कंपनियाँ अपने मुनाफे को बचाने के लिए हाथ-पांव मार रही हैं, वहीं TCS के CEO के. कृतिवासन ने अपनी टीम को एक बिल्कुल अलग ‘मिशन’ पर लगा दिया है: “क्लाइंट का पैसा बचाओ, चाहे हमारा रेवेन्यू गिर ही क्यों न जाए।”
अब यही नया नॉर्मल है
मुंबई में आयोजित Nasscom Technology and Leadership Forum के दौरान कृतिवासन ने साफ कर दिया कि TCS अब पुराने ‘बिलिंग मॉडल’ के पीछे नहीं भागेगी। उन्होंने कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगर कोई प्रोजेक्ट Generative AI (GenAI) के जरिए कम समय और कम लागत में पूरा हो सकता है, तो कस्टमर्स को तुरंत वही आप्शन दिया जाए।
के. कृतिवासन ने कहा की “हमारा लक्ष्य क्लाइंट को सबसे स्मार्ट और एफिशिएंट (Efficient) सोल्यूशन देना है। अगर AI किसी काम को बेहतर और सस्ता बना सकता है, तो हमें ईमानदारी से उसे अपनाना होगा, भले ही इससे हमारी शॉर्ट-टर्म बिलिंग प्रभावित हो।”
क्यों लिया TCS ने यह रिस्क?
छोटे मुनाफे के बजाय TCS ‘क्लाइंट लॉयल्टी’ पर फोकस कर रही है। जब क्लाइंट को दिखेगा कि कंपनी उनके पैसे बचा रही है, तो वे बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स के लिए भी TCS पर ही भरोसा करेंगे।
अब दौर ‘घंटों’ के हिसाब से पैसे लेने का नहीं, बल्कि ‘नतीजों’ का है। आईटी इंडस्ट्री अब ‘लेबर-इंटेंसिव’ से हटकर ‘रिजल्ट-ओरिएंटेड’ हो रही है।
फरवरी 2026 में Nifty IT Index में 21% की भारी गिरावट ने साफ कर दिया है कि निवेशक अब केवल उन्हीं कंपनियों पर दांव लगाएंगे जो AI को पूरी तरह अपना चुकी हैं।
क्या खतरे में हैं नौकरियां?
जहाँ पूरी दुनिया में AI के कारण ‘जॉब लॉस’ का डर बना हुआ है, वहीं TCS और Wipro जैसी दिग्गज कंपनियों का नजरिया थोड़ा अलग और पॉजिटिव है। उनका मानना है कि AI पुराने ढर्रे के काम को तो खत्म करेगा, लेकिन ‘वर्क वॉल्यूम’ को इतना बढ़ा देगा कि नए स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स की मांग और बढ़ जाएगी। यह छंटनी का नहीं, बल्कि री-स्किलिंग का दौर है।
टेक एक्सपर्ट्स का नजरिया
TCS का यह कदम भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। यह संदेश साफ है: जो कंपनियाँ अपने पुराने बिजनेस मॉडल को बचाने के चक्कर में नई तकनीक से मुंह मोड़ेंगी, वे इतिहास बनकर रह जाएंगी। सर्वाइवल का नया मंत्र अब सिर्फ अडैप्टेबिलिटी है।