"मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू" – आराधना (1969) एक हसीना थी, एक दीवाना था" – कर्ज़ (1980) सोलह…
मुंबई। कभी-कभी कुछ आवाजें सिर्फ सुनी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं। ऐसी ही एक आवाज थीं सुमन कल्याणपुर,…