नई दिल्ली। पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे सुरेश कलमाड़ी का 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे में मंगलवार, 6 जनवरी की तड़के करीब 3:30 बजे अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पुणे के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
परिवार के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर को मंगलवार दोपहर 2:00 बजे तक पुणे के एरंडवणे स्थित कलमाड़ी हाउस में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद दोपहर 3:30 बजे पुणे के नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशानभूमि में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
गौरतलब है कि सुरेश कलमाड़ी साल 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन में अहम भूमिका निभाने के कारण चर्चा में आए थे। हालांकि, इसी आयोजन के दौरान उन पर प्रबंधन और ठेकों के आवंटन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी और उनके खिलाफ आपराधिक साजिश सहित कई धाराओं में मुकदमा चला।पायलट से राजनीति तक का सफर
सुरेश कलमाड़ी ने राजनीति में आने से पहले भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में अपना करियर शुरू किया था। वर्ष 1960 में वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में शामिल हुए और बाद में भारतीय वायु सेना का हिस्सा बने। उन्होंने 1964 से 1972 तक वायु सेना में बतौर पायलट सेवाएं दीं। इसके बाद 1972 से 1974 तक वे NDA की एयर फोर्स ट्रेनिंग टीम में इंस्ट्रक्टर रहे। वायु सेना में स्क्वाड्रन लीडर के पद तक पहुंचने के बाद उन्होंने सेवानिवृत्ति ली।
राज्यसभा से लोकसभा तक का राजनीतिक सफर
वायु सेना से रिटायर होने के बाद सुरेश कलमाड़ी वर्ष 1977 में राजनीति में सक्रिय हुए और युवा कांग्रेस से जुड़ गए। इसी दौरान उन्होंने खेल प्रशासन में भी अपनी भूमिका मजबूत की। वर्ष 1980 में वे महाराष्ट्र एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बने।
राजनीति में आगे बढ़ते हुए कलमाड़ी तीन बार राज्यसभा के सदस्य चुने गए। वे 1982 से 1996 तक और फिर 1998 में राज्यसभा सांसद रहे। इसके अलावा वे लोकसभा के लिए भी चुने गए। वर्ष 1996 में पहली बार लोकसभा पहुंचे और 2004 में दोबारा सांसद बने।
पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में उन्हें 1995 से 1996 तक रेल राज्य मंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने रेल बजट भी पेश किया था।
खेल प्रशासन में अहम भूमिका
राजनीति के साथ-साथ सुरेश कलमाड़ी खेल प्रशासन में भी लंबे समय तक सक्रिय रहे। वर्ष 1996 में वे भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष चुने गए और 2012 तक इस पद पर बने रहे। इसके अलावा वे एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन (AAA) के अध्यक्ष भी रहे।
उनके कार्यकाल में वर्ष 2010 में दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ। हालांकि, यह आयोजन बड़े विवादों में घिरा रहा और कलमाड़ी पर भी भ्रष्टाचार सहित कई गंभीर आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।