मौजूदा समय में सोशल मीडिया पर लोग अधिक सक्रिय रहते हैं और इसके माध्यम से आसानी से जानकारी साझा करते हैं और जुड़े रहते हैं. लेकिन कुछ लोग सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर लोगों को परेशान करते हैं और उनसे मोटी रकम की ठगी करते हैं.
विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसमें अपराधी लोगों को डराते हैं और धमकाते हैं, कभी दारोगा, कभी कमिश्नर या सीबीआई/ईडी जैसी एजेंसियों के नाम पर. इसके बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट के खतरे का डर दिखाकर लाखों-करोड़ों रुपये ट्रांसफर कराने के लिए मजबूर किया जाता है.
अब इस गंभीर मामले को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आदेश दिया कि सीबीआई पूरे देश में हुए डिजिटल फ्रॉड के मामलों की जांच करे. साथ ही अदालत ने कहा कि एजेंसी को बैंकों की भूमिका की भी स्वतंत्र रूप से जांच करनी होगी और इसके लिए उसे पूरी छूट दी गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइबर क्राइम से पीड़ितों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को धोखा देने वाले हर मामले की जांच आवश्यक है. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और इसके लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं.
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