पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR 2.0) कार्यक्रम को लेकर चुनाव आयोग को ‘कड़ा संदेश’ भेजा है. उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार को एक ‘हाई-ऑक्टेन’ लेटर लिख कर इस पुरे प्रोसेस को तत्काल फ्रीज़ (रोकने) करने की मांग की है. ममता ने CEC को ‘अल्टिमेटम’ देते हुए कहा कि ‘यह पूरा SIR कार्यक्रम ‘फ़ेलियर’ है, जो ‘अनप्लांड मेस’ और ‘ख़तरे’ को बुलावा दे रहा है’.
SIR को रोकने की मांग के पीछे क्या हैं कारण?
ममता बनर्जी ने पत्र में बताया है की SIR जल्दबाजी का नतीजा है और अपर्याप्त प्लानिंग के साथ इसे लागू किया गया है, जिसके पीछे ये तीन बड़े ‘फ़ैक्टर्स’ हैं:
• उनका आरोप है कि अधिकारियों और नागरिकों पर ये प्रक्रिया “बिना किसी पर्याप्त योजना या बुनियादी तैयारी” के जबरन लागू की गई है.
• बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLO) के प्रशिक्षण में गंभीर कमियां हैं, और ज़रूरी दस्तावेज़ों को लेकर भी भारी अस्पष्टता बनी हुई है.
• मुख्यमंत्री ने शिकायत की है कि ये प्रक्रिया ऐसे समय में की जा रही है जब मतदाता अपनी रोज़ी-रोटी के कामों में व्यस्त हैं, जिसके चलते BLOs के लिए उनसे मिलना “लगभग असंभव” हो गया है.
ममता बनर्जी ने इस प्लानिंग फ़ेलियर की “मानवीय कीमत” पर विशेष ज़ोर दिया, जिसे उन्होंने असहनीय बताया है. उन्होंने एक दुखद घटना का हवाला देते हुए लिखा कि जलपाईगुड़ी में तैनात एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (जो BLO के रूप में काम कर रही थीं) ने एसआईआर से जुड़े अत्यधिक दबाव के कारण मानसिक रूप से टूटकर आत्महत्या कर ली. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद से कई अन्य लोगों ने भी अपनी जान गंवाई है’.
ममता बनर्जी चाहती हैं कि CEC तुरंत इसपर एक्शन ले, SIR को हॉल्ट करें, और उचित ट्रेनिंग व सपोर्ट के साथ टाइमलाइन और प्रोसेस को बारीकी से री-एग्ज़ामिन करे.